सुबह की अलार्म घड़ी की आवाज़ कोई नई शुरुआत नहीं है, बल्कि उस थर्मोडायनामिक चक्र की सीटी है जो तुम्हें याद दिलाती है कि तुम केवल एक ‘ईंधन’ हो। तुम अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए शीशे में जिसे देखते हो, वह इंसान नहीं, बल्कि एक ‘आंकड़ा’ है जो आज फिर से घिसने के लिए तैयार है। तुम सोचते हो तुम दफ्तर जा रहे हो? गलत। तुम असल में अपनी रीढ़ की हड्डी को गिरवी रखकर उस Herman Miller Embody की किश्तें चुकाने जा रहे हो, जिसे तुमने इसलिए खरीदा था ताकि तुम्हारा ‘पोस्चर’ (Posture) ठीक रहे, जबकि हकीकत में वह कुर्सी तुम्हारी आत्मा के झुकने का सिंहासन है।
समाज ने तुम्हें सिखाया है कि ‘मेहनत’ (Hard Work) का कोई मोल है। बकवास। यह ‘श्रम का मूल्य’ कोई पवित्र मंत्र नहीं, बल्कि एक गंदा गणित है। जिसे तुम ‘करियर’ कहते हो, वह असल में सब्जी मंडी की उस कीचड़ भरी गली की तरह है जहाँ हर कदम पर तुम्हारी ‘औकात’ की कीमत गिरती है। सूचना ज्यामिति (Information Geometry) का ढोंग छोड़ो; हकीकत यह है कि तुम उस ‘रीमैनियन मैनिफोल्ड’ (Riemannian Manifold) पर रेंगते हुए एक कीड़े हो। यहाँ वक्रता (Curvature) इतनी तीखी है कि तुम जितनी तेज भागने की कोशिश करते हो, ‘फिशर इन्फॉर्मेशन मेट्रिक’ (Fisher Information Metric) के हिसाब से तुम उतने ही गहरे गटर में गिरते हो। तुम्हारा ज्ञान, तुम्हारा अनुभव, सब उस सड़क किनारे की बासी ‘कटिंग चाय’ की तरह है जिसे दोबारा उबालने पर सिर्फ कड़वाहट और पेट की जलन बचती है।
तुम्हारी ‘कार्यकुशलता’ (Efficiency) और कुछ नहीं, बल्कि पेट की भूख और बैंक बैलेंस के बीच का वह अंतर है जो कभी नहीं भरता। तुम जो घंटों मीटिंग्स में ‘सिनर्जी’ (Synergy) और ‘स्ट्रेटेजी’ की जुगाली करते हो, वह असल में उस थर्मोडायनामिक हीट लॉस (Thermodynamic Heat Loss) की तरह है जो एक पुराने इंजन के खराब होने पर धुएं के रूप में निकलती है। दस लोग एक कमरे में, दस दिमाग, और नतीजा शून्य। तुम्हारा ‘एन्ट्रॉपी’ (Entropy) कम करने का दावा उतना ही झूठा है जितना कि उस Montblanc Meisterstück से लिखा हुआ ‘सफलता का मंत्र’—कलम महँगी है, शाही शाही है, लेकिन शब्द वही सड़े हुए हैं जो पिछली सदी के बाबू फाइलों में दबाकर मर गए।
संगठन (Organization) कोई ढांचा नहीं, बल्कि एक ऐसा परजीवी है जो तुम्हारी ‘इन्फॉर्मेशन’ को सोखकर उसे ‘शोर’ (Noise) में बदल देता है। जब तुम्हारा बॉस तुम पर चिल्लाता है, तो वह कोई लीडरशिप नहीं दिखा रहा, बल्कि वह सिस्टम की उस ‘मैक्सवेल डेमन’ (Maxwell’s Demon) वाली फितरत को जी रहा है जहाँ तुम्हारी भावनाओं को सिर्फ ‘डाटा एरर’ माना जाता है। तुम दुखी हो? तुम थके हुए हो? यह सब तुम्हारी अपनी गलती है। तुम अपनी मानसिक शांति ढूँढने के लिए उस Keychron Q6 मैकेनिकल कीबोर्ड की खट-खट में शरण लेते हो, यह भूलकर कि वह शोर सिर्फ तुम्हारी बर्बादी के पलों की गिनती कर रहा है। हर की-स्ट्रोक तुम्हारी जिंदगी का एक और सेकंड कम कर रहा है, और तुम उसे ‘उत्पादकता’ (Productivity) कहते हो।
सच्चाई तो यह है कि तुम एक बहुआयामी स्थान (High-dimensional space) में कैद हो, जहाँ हर नया ‘सॉफ्टवेयर अपडेट’ तुम्हारे अस्तित्व को और थोड़ा छोटा कर देता है। जिसे तुम करियर की ऊँचाई कहते हो, वह असल में एक ऊंचे पहाड़ से गिरते हुए ‘लोकल ऑप्टिमाइजेशन’ (Local Optimization) का भ्रम है। तुम गिर रहे हो, गुरुत्वाकर्षण तुम्हें खींच रहा है, लेकिन तुम्हें लग रहा है कि तुम उड़ रहे हो क्योंकि तुमने हवा की रगड़ को ‘पैशन’ का नाम दे दिया है। दुनिया को तुम्हारी ज्यामिति से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे सिर्फ उस ‘वेस्ट’ (Waste) से मतलब है जो तुम अपने पीछे छोड़ जाओगे। चुप रहो और काम करो, क्योंकि तुम्हारी चीखें भी इस सिस्टम के लिए केवल एक ‘सिग्नल लॉस’ हैं।
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