‘लोकहित’ का पाखंड

पिछली बार जब हम मिले थे, तो हमने तुम्हारे दिमाग के उस रासायनिक कचरे पर चर्चा की थी जिसे तुम ‘बर्नआउट’ कहते हो। आज, ज़रा उस बड़े नाले का ढक्कन खोलते हैं जिसे दुनिया ‘संगठन’ या ‘सार्वजनिक मूल्य’ (Public Value) के नाम से पूजती है। यह कोई पवित्र मंदिर नहीं है, बल्कि एक सड़ा हुआ सांख्यिकीय बहुआकृति (Statistical Manifold) है, जहाँ तुम्हारी हैसियत हलवाई की दुकान पर चाशनी में तैरती उस मरी हुई मक्खी से ज्यादा नहीं है, जिसे ग्राहक के देखने से पहले ही चम्मच से निकालकर फेंक दिया जाता है। तुम जिसे ‘करियर’ कहते हो, वह केवल अपनी भूख और अगले महीने की ईएमआई के बीच का एक न खत्म होने वाला हिंसक संघर्ष है।

भ्रम: सांख्यिकीय कचरा

दुनिया भर के कांच के केबिनों में बैठे ‘प्रोफेशनल्स’ इस मुगालते में जीते हैं कि वे समाज के लिए कोई महान मूल्य पैदा कर रहे हैं। हकीकत यह है कि तुम केवल एक विशाल मशीन के गियर में फंसी धूल हो। जिसे तुम ‘योगदान’ कहते हो, वह सूचना ज्यामिति (Information Geometry) की दृष्टि में केवल एक ‘जियोडेसिक’ भटकाव है। अमारी की ‘द्वैत सपाटता’ (Dual Flatness) का सिद्धांत यहाँ तुम्हारे जीवन की विडंबना को नंगा करता है। एक तरफ प्रबंधन का वह ‘प्राइमल’ सपना है जो कागज़ पर सीधा लकीर जैसा दिखता है, और दूसरी तरफ तुम्हारे रोज़मर्रा के संघर्ष का ‘डुअल’ नर्क है, जो किसी पुरानी दिल्ली की गली जैसा टेढ़ा-मेढ़ा और बदबूदार है। इन दोनों के बीच का जो अंतर है—वह ‘फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक’—वही तुम्हारी बीवी के ताने और बॉस की गालियों का सटीक माप है। तुम बस उस बासी समोसे की तरह हो जिसे कैंटीन वाला ‘फ्रेश’ बताकर बेचता है, और जिसे खाने के बाद आत्मा और आंतें दोनों जवाब दे जाती हैं।

सब बकवास है।

ज्यामिति: रीढ़विहीन अस्तित्व

जब तुम ‘व्यावसायिक उपयोगिता’ (Business Utility) की बात करते हो, तो तुम असल में अपनी इंसानियत को एक ‘लॉस फंक्शन’ में बदल रहे होते हो। कुल्बैक-लीब्लर डाइवर्जेंस (Kullback-Leibler Divergence) को न्यूनतम करने की कोशिश में तुम अपनी रीढ़ की हड्डी को अधिकतम तोड़ रहे हो। सड़कों पर ‘जुगाड़’ से चलने वाला ठेले वाला तुमसे बेहतर ज्यामितीय समझ रखता है; वह जानता है कि संसाधन और रद्दी के बीच संतुलन कैसे बनाना है। लेकिन तुम? तुम अपनी नश्वरता को छुपाने के लिए बेजान वस्तुओं का सहारा लेते हो।

जरा देखो खुद को। तुम्हारे जैसे रीढ़विहीन मांस के लोथड़े को सीधा खड़ा रखने के लिए यह सिस्टम तुम्हें एक महंगी एर्गोनोमिक कुर्सी खरीदने पर मजबूर करता है। तुम सोचते हो कि एक छोटी कार की कीमत जितनी यह कुर्सी तुम्हारे गिरते हुए करियर को सहारा देगी? यह कुर्सी तुम्हारी पीठ को तो सीधा रख सकती है, लेकिन उस सांख्यिकीय शोर (Statistical Noise) को कम नहीं कर सकती जो तुम्हारी आत्मा को दीमक की तरह खा रहा है। तुम चाहे हर्मन मिलर पर बैठो या सड़क के किनारे ईंट पर, तुम्हारी औकात उस चाइनीज़ मोबाइल बैटरी जैसी ही रहेगी जो 90% चार्जिंग दिखाते हुए भी स्विच ऑफ हो जाती है। तुम्हारा ‘इष्टतम बिंदु’ (Optimum Point) वही है जहाँ तुम पूरी तरह टूटकर बिखर जाओगे।

काम नहीं, यह धीमा जहर है।

पतन: शून्यता की ओर

ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) का दूसरा नियम अटल है: व्यवस्था अंततः अव्यवस्था (Chaos) में ही विलीन होगी। तुम जिसे ‘प्रोग्रेस’ या ‘ग्रोथ’ कहते हो, वह वास्तव में उस मैनिफोल्ड पर एक फिसलन भरी ढलान है जो तुम्हें सीधे श्मशान की ओर ले जा रही है। तुम्हारे एक्सेल शीट्स, तुम्हारी पीपीटी प्रेजेंटेशन्स—यह सब एंट्रॉपी (Entropy) के महासागर में गिरने वाली बारिश की बूंदें हैं। उनका कोई अस्तित्व नहीं है।

घर जाने की बात मत सोचो। जिसे तुम ‘घर’ कहते हो, वह भी एक और छोटा कॉर्पोरेट ढांचा है जहाँ तुम्हें हर शाम अपनी ‘उपयोगिता’ सिद्ध करनी पड़ती है। वहाँ भी तुम केवल एक संसाधन हो, एक एटीएम मशीन हो, या फिर एक ड्राइवर। सांख्यिकीय रूप से, तुम बहुत पहले ही अप्रासंगिक हो चुके हो। यह दुनिया केवल एक अनुकूलन एल्गोरिदम (Optimization Algorithm) है जो फालतू डेटा को डिलीट करने में व्यस्त है, और तुम वह फालतू डेटा हो।

चाय ठंडी हो चुकी है और उसमें एक कीड़ा गिर गया है। बिल्कुल तुम्हारी जिंदगी की तरह।

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