सांख्यिकीय भ्रम

पिछली बार जब मैंने उत्पादकता के उस खोखलेपन का जिक्र किया था जिसे तुम ‘करियर’ कहते हो, तो वह महज एक चेतावनी थी। आज उस सड़ांध को कुरेदने का वक्त है जिसे दुनिया ‘संगठन’ या ‘कॉर्पोरेट इकाई’ कहती है। लोग सोचते हैं कि एक कंपनी इंसानों का समूह है जो किसी ‘मिशन’ के लिए साथ आए हैं। क्या बकवास है। यह ‘पब्लिक फेस’ या ‘कॉर्पोरेट कल्चर’ और कुछ नहीं, बस उन भूखे भेड़ियों का एक झुंड है जो एक-दूसरे की प्लेट से निवाला छीनने के लिए ‘एथिक्स’ का सस्ता मुखौटा पहने हुए हैं।

भूख की ज्यामिति

विश्वविद्यालय के वातानुकूलित कमरों में हम इसे ‘सांख्यिकीय विविधता’ (Statistical Manifold) कहते हैं, लेकिन असल जिंदगी की तपती सड़क पर यह ‘भूख का भूगोल’ है। एक संगठन इंसानों का परिवार नहीं है; यह प्रोबेबिलिटी डिस्ट्रीब्यूशन (Probability Distributions) का एक अराजक ढेर है। यहाँ हर कर्मचारी एक ‘डेटा पॉइंट’ है, जो किसी महान उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि अपनी अगली ईएमआई (EMI) चुकाने के डर से कांप रहा है। जब तुम सुबह उस भीड़भरी बस में चढ़ते हो, किसी अजनबी की बगल में दबकर खड़े होते हो और हवा में तैरती पसीने की खट्टी गंध सूंघते हो—वही तुम्हारी ‘संस्थागत संस्कृति’ की असली सुगंध है। बाकी सब पीआर (PR) का तमाशा है।

सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के नजरिए से देखें, तो तुम्हारे दफ्तर का हर फैसला ‘फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक’ पर रेंगता हुआ एक कीड़ा है। तुम जिसे ‘टीम वर्क’ कहते हो, वह असल में संसाधनों की कमी से पैदा हुई एक मजबूरी है, एक घर्षण है जिसे कम करने के लिए मैनेजमेंट तुम्हारे दिमाग में झूठी उम्मीदों का ग्रीस लगाता है। तुम्हारी हैसियत बस इतनी है कि तुम खुद को एक ‘संसाधन’ मानकर खुश हो। शायद तुम्हें लगता है कि ऑफिस में मंगाया गया वह महंगा Herman Miller Aeron Chair तुम्हारी रीढ़ की हड्डी को बचा लेगा और तुम्हें ‘प्रोफेशनल’ महसूस कराएगा। लेकिन हकीकत यह है कि एक लाख की कुर्सी पर बैठकर दस हजार की फाइलों पर सिर खपाना, आधुनिक गुलामी का सबसे एर्गोनोमिक (Ergonomic) मजाक है। वह कुर्सी तुम्हारी रीढ़ को सीधा रख सकती है, लेकिन उस बोझ का क्या जो तुम्हारी आत्मा को कुचल रहा है?

मशीनी कसाईखाना

अब बात करते हैं तुम्हारे नए मालिकों की—एआई एजेंटों की। लोग एआई से डर रहे हैं कि वह नौकरी खा जाएगा। अरे मूर्ख, एआई तुम्हारी नौकरी नहीं खा रहा, वह सिर्फ उस ‘शोर’ (Noise) को हटा रहा है जो तुम पैदा करते हो। एक संगठन के सांख्यिकीय मैनिफोल्ड पर, एआई एजेंट ‘जियोडेसिक’ (Geodesic) यानी सबसे छोटे और सीधे रास्ते पर चलते हैं। उन्हें ‘लॉयल्टी’, ‘पैशन’ या ‘बर्नआउट’ जैसे मानवीय ड्रामे से कोई मतलब नहीं है। उनके लिए तुम्हारा ‘ह्यूमन टच’ सिर्फ एक ‘एन्ट्रॉपी’ है, एक बाधा है जिसे सिस्टम से बाहर किया जाना चाहिए।

भविष्य किसी ‘महान समाज’ का नहीं, बल्कि ‘न्यूनतम त्रुटि’ (Minimum Error) का है। एआई एजेंट अब वह काम कर रहे हैं जो कभी क्रूर जमींदार किया करते थे—संसाधन निचोड़ना। फर्क सिर्फ इतना है कि मशीन को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आवंटन के बाद किसे खाना मिलेगा और किसे सिर्फ एक एरर लॉग (Error Log) में दर्ज किया जाएगा। तुम दफ्तर के शोरगुल से बचने के लिए कानों पर Sony WH-1000XM5 Noise Canceling Headphones चढ़ा लेते हो, यह सोचकर कि तुम दुनिया को म्यूट कर रहे हो। लेकिन असल में, तुम उस मशीन की आवाज़ सुनने से डर रहे हो जो चीख-चीख कर कह रही है कि अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है। तुम शोर को दबाना चाहते हो क्योंकि तुम्हारे पास कहने के लिए कुछ सार्थक बचा ही नहीं है।

अस्तित्व का शून्य

संगठनों का यह ‘सार्वजनिक स्वरूप’ अब केवल एक ब्रांडिंग अभ्यास बनकर रह गया है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे सड़क किनारे किसी ढाबे पर ‘शुद्ध पारिवारिक भोजनालय’ का बोर्ड लगा हो, लेकिन रसोई में चूहे नाच रहे हों और बर्तन धोने वाला पानी नाली से आ रहा हो। हम सब उस सड़ांध का हिस्सा हैं। सूचना ज्यामिति का क्रूर सत्य यह है कि इस विशालकाय समीकरण में तुम्हारा पूरा जीवन एक ‘राउंडिंग एरर’ (Rounding Error) से ज्यादा कुछ नहीं है। तुम जितना अधिक ‘महत्वपूर्ण’ होने का नाटक करते हो, वास्तविकता के धरातल पर तुम्हारी कीमत उतनी ही कम होती जाती है।

अगर तुम्हें अब भी लगता है कि तुम्हारा संगठन दुनिया बदल रहा है, तो जाओ, जाकर किसी टूटे हुए प्रेशर कुकर की सीटी को ध्यान से सुनो। वह भी अपनी पूरी ताकत से चिल्लाता है, लेकिन उसका मकसद सिर्फ फटने से बचना होता है। यही तुम्हारी कॉरपोरेट नियति है। अपना लैपटॉप बंद करो और घर जाओ—बशर्ते वहां कोई तुम्हारा इंतज़ार करने वाला बचा हो। गणित को तुम्हारे आंसुओं से कोई फर्क नहीं पड़ता।

コメント

コメントを残す

メールアドレスが公開されることはありません。 が付いている欄は必須項目です