सांख्यिकीय कसाईखाना

ढाबे की मक्खी और शासन का ढोंग

जब मैं विश्वविद्यालय की उस दमघोंटू हवा से निकलकर सड़क किनारे इस पुराने, सीलन भरे ढाबे पर बैठता हूँ, और सामने रखी ठंडी चाय में तैरती हुई एक मरी हुई मक्खी को देखता हूँ, तो मुझे ‘सार्वजनिक इच्छा’ (Public Will) और ‘सुशासन’ जैसे शब्द किसी फटे हुए मोजे की तरह बदबूदार लगने लगते हैं। आप जिसे ‘लोकतांत्रिक निर्णय’ कहते हैं, वह असल में क्या है? वह केवल राशन की कतार में खड़े भूखे लोगों की सामूहिक चिड़चिड़ाहट है, जिन्हें यह झूठा आश्वासन दिया गया है कि उनके हिस्से की रोटी का फैसला अब कोई ‘मशीनी दिमाग’ करेगा।

किसी भी सरकारी विभाग या कॉर्पोरेट बोर्डरूम में होने वाली बैठकें दरअसल एक मानसिक कब्ज का प्रदर्शन हैं। सूट-बूट पहने लोग वहां बैठते हैं, बासी बिस्कुट चबाते हैं और ‘पॉलिसी’ की बात करते हैं, जबकि उनकी बुद्धि उस सस्ते स्मार्टफोन की तरह है जो ज़रा सा बोझ पड़ते ही गर्म होकर हैंग हो जाता है। जिसे आप ‘पब्लिक ओपिनियन’ कहते हैं, वह कोई पवित्र रूह नहीं, बल्कि एक गंदे रेलवे प्लेटफॉर्म पर बिखरे हुए कचरे के ढेर की तरह है। सूचना ज्यामिति (Information Geometry) की नज़र में, आप और आपकी भावनाएँ केवल एक ‘सांख्यिकीय विविध’ (Statistical Manifold) के नक्शे पर दर्ज एक नगण्य बिंदु हैं—उस कचरे के ढेर में एक और प्लास्टिक की थैली।

फिशर सूचना: भ्रष्टाचार का गणित

इंसानी भावनाएं? वे केवल उस बेमतलब शोर की तरह हैं जो एक खराब प्रेशर कुकर से निकलता है। जब हुक्मरान कहते हैं कि वे ‘जनता की नब्ज’ को माप रहे हैं, तो वे असल में उस ‘फिशर सूचना’ (Fisher Information) को खुरच रहे होते हैं। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है; यह उस कसाई का गणित है जो यह जानता है कि बकरे की गर्दन पर चाकू किस कोण (Angle) पर रखने से कम से कम खून फैलेगा। फिशर सूचना मैट्रिक्स वह पैमाना है जो बताता है कि किसी भ्रष्ट व्यवस्था में थोड़ा सा बदलाव करने पर जनता कितना शोर मचाएगी। यह संवेदनशीलता का माप नहीं, बल्कि सहनशीलता की परीक्षा है।

यह ‘रीमानियन मैनिफोल्ड’ (Riemannian Manifold) की वक्रता (Curvature) ही यह तय करती है कि आपके जीवन का मूल्य क्या है। आप सोचते हैं कि आप स्वतंत्र हैं? गलतफहमी है। आप केवल उस सांख्यिकीय ढलान पर लुढ़कते हुए एक पत्थर हैं, जिसका गिरने का रास्ता उस ठंडे और निर्दयी सिलिकॉन तर्क द्वारा पहले ही तय किया जा चुका है। वह तर्क, जो आपकी भूख और आपकी लाचारी को केवल एक डेटा पॉइंट मानता है, जिसे किसी स्प्रेडशीट में ‘एरर’ कहकर छुपा दिया जाएगा।

इष्टतमीकरण का नंगा नाच

यहाँ ‘इष्टतमीकरण’ (Optimization) का असली तमाशा शुरू होता है। यह शब्द सुनने में बड़ा तकनीकी और साफ-सुथरा लगता है, लेकिन हकीकत में यह उस बनिये की चालाकी है जो तराजू के नीचे चुंबक चिपका देता है। किसी संगठन में निर्णय लेना केवल ‘कुल्बैक-लीब्लर डाइवर्जेंस’ (KL Divergence) को कम करना है—यानी कि आपकी उम्मीदों और कड़वी वास्तविकता के बीच के उस अंतर को खत्म करना जो आपको विद्रोह करने पर मजबूर कर सकता है। यह ‘इष्टतमीकरण’ असल में एक जेल की दीवार को और ऊँचा करने जैसा है, ताकि कोई भी सांख्यिकीय विचलन (Statistical Deviation) बाहर न निकल सके।

जब वे कहते हैं कि वे संसाधनों का ‘इष्टतम आवंटन’ कर रहे हैं, तो वे असल में उस इटालियन लेदर वाले महंगे ब्रीफकेस को नोटों से भरने का सबसे छोटा और सुरक्षित रास्ता ढूँढ रहे होते हैं, जिसे लेकर वे अगली ‘ग्लोबल समिट’ में भागने वाले हैं। यह ब्रीफकेस चाहे कितना भी आलीशान क्यों न हो, इसके अंदर केवल खोखले वादे और आपकी बर्बादी के दस्तावेज हैं। यह प्रक्रिया उतनी ही ठंडी है जितनी कि एक मोर्चरी की मेज। इसमें आपकी ‘इच्छा’ का स्थान केवल उतना ही है जितना कि एक नाली में गिरते हुए खोटे सिक्के का—सिर्फ एक धातु का टुकड़ा जो अब कीचड़ का हिस्सा है।

सिलिकॉन का पिंजरा

शासन का अर्थ अब लोगों को समझाना नहीं रह गया है। अब यह केवल उनके व्यवहार के ‘फिशर मैट्रिक्स’ को इतना कस देने का खेल है कि आपकी हर हरकत, हर छोटी से छोटी चाहत, पहले से ही उस सांख्यिकीय वितरण का हिस्सा बन जाए। आप जो आज खरीदने वाले हैं, आप जो कल सोचने वाले हैं, वह सब उस ज्यामितीय पिंजरे की सलाखों के बीच पहले से ही तय है। यह ‘सिस्टम’ न्याय नहीं करता; यह केवल एन्ट्रापी (Entropy) को कम करता है। और इस सिस्टम के लिए, आपकी आज़ादी सबसे बड़ी एन्ट्रापी है जिसे खत्म किया जाना जरूरी है।

यह कोई भविष्य का डर नहीं है, यह आपकी आज की सड़ी हुई हकीकत है। आप उस महंगे हस्तनिर्मित फाउंटेन पेन से अपनी शिकायतों को लिखकर यह भ्रम पाल सकते हैं कि आपकी आवाज़ सुनी जाएगी। जैसे कि उस पेन की चमक और ब्रांड का नाम आपकी व्यथा को वजन दे देगा। लेकिन याद रखिए, वह स्याही उस कागज़ पर गिरने से पहले ही उस अदृश्य एल्गोरिदम द्वारा ‘नॉइज़’ (Noise) घोषित कर दी गई है। आपकी अंतरात्मा, आपकी नैतिकता, आपका गुस्सा—यह सब सूचना के प्रसंस्करण में होने वाली एक मामूली देरी (Latency) है जिसे अगले अपडेट में फिक्स कर दिया जाएगा। चाय अब पूरी तरह ठंडी हो चुकी है, उस पर मलाई जम गई है, और यह दुनिया भी उतनी ही ठंडी, बेस्वाद और लसलसी हो चुकी है।

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