ज्यामितीय कैद

जिसे आप ‘पवित्र परिश्रम’ या ‘करियर’ कहते हैं, वह वास्तव में एक सांख्यिकीय मैनिफोल्ड (Statistical Manifold) पर रेंगता हुआ एक नश्वर और तुच्छ बिंदु मात्र है। सुबह की लोकल ट्रेन में लटके हुए, पसीने और हताशा की गंध के बीच, क्या आपको वास्तव में लगता है कि आप किसी महान उद्देश्य की ओर बढ़ रहे हैं? यह भ्रम त्याग दीजिये। आप भौतिकी के नियमों के अधीन, मांस और हड्डियों का एक भद्दा परिवहन हैं, जिसे ‘सफलता’ के नाम पर बेवकूफ बनाया जा रहा है।

श्रम कोई पूजा नहीं है; यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की एक महंगी और अक्षम प्रक्रिया है। आपका मस्तिष्क ‘सार्थकता’ का नाटक रचकर उस चयापचय लागत (Metabolic Cost) को सही ठहराने की कोशिश करता है, जो आप रोज अपने मालिक के लिए चुकाते हैं। हकीकत यह है कि एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के क्यूबिकल में बैठकर एक्सेल शीट भरना और सड़क किनारे [जले हुए तेल में तला समोसा](https://amazon.in/s?k=street+food+nightmare) खाकर पेट खराब करना—दोनों में कोई तात्विक अंतर नहीं है। दोनों ही अस्तित्व को बनाए रखने के लिए किए गए निम्न-स्तरीय ऊर्जा विनिमय हैं, जहाँ इनपुट कचरा है और आउटपुट केवल शोर।

वक्रता का अभिशाप

मानव संसाधन (HR) विभाग के मंदबुद्धि लोग जिसे ‘अनुभव’ कहते हैं, वह विज्ञान की भाषा में ‘फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक्स’ (Fisher Information Matrix) की वक्रता है। जब आप किसी कौशल में माहिर होते हैं, तो आप ‘ज्ञानी’ नहीं होते; आप ‘विकृत’ हो जाते हैं। आपका दिमाग एक विशेष ज्यामितीय आकार में मुड़ जाता है, जिससे सूचना की वक्रता (Curvature) इतनी तीव्र हो जाती है कि आप किसी और काम के लायक नहीं रहते।

यह विशेषज्ञता नहीं, बल्कि मानसिक पंगुता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप एक [सस्ती और सख्त चमड़े की जूतियों](https://amazon.in/s?k=uncomfortable+formal+shoes) को सालों तक पहनकर अपने पैरों को हमेशा के लिए टेढ़ा कर लें। अब वह जूता (नौकरी) तो फिट बैठता है, लेकिन नंगे पैर चलने पर आपको केवल दर्द होगा। जब बाजार बदलता है, तो आप जैसे ‘विशेषज्ञों’ को सबसे पहले बाहर फेंक दिया जाता है क्योंकि आपकी ज्यामितीय संरचना इतनी कठोर हो चुकी है कि उसे नई जगह पर फिट करने की लागत (Information Cost) बहुत अधिक है। आप एक पुराने सॉफ़्टवेयर का बग बन चुके हैं जिसे अब कोई डीबग नहीं करना चाहता।

परिवहन का क्रूर गणित

श्रम बाजार की गतिशीलता को समझने के लिए भावनाओं की नहीं, मोंज-कांतोरोविच (Monge-Kantorovich) के ‘ऑप्टिमल ट्रांसपोर्ट थ्योरी’ की आवश्यकता है। पूंजीवाद के लिए, आप और मैं केवल रेत के कण हैं जिन्हें स्थान A से स्थान B तक न्यूनतम लागत पर स्थानांतरित करना है। इस गणितीय समीकरण में आपकी ‘निष्ठा’, ‘सपने’ या ‘परिवार’ केवल घर्षण गुणांक (Friction Coefficients) हैं जो प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

एक आदर्श दुनिया में, श्रम को पानी की तरह बहना चाहिए—बिना किसी प्रतिरोध के, बिना किसी ‘संस्कृति’ के नाटक के। लेकिन हम इंसान अपनी भावुकता का बोझ लेकर चलते हैं। मैं खुद इस पाखंड से अछूता नहीं हूँ। मेरे मेज पर यह [बेहद महंगी इटैलियन चमड़े की डायरी](https://amazon.in/s?k=luxury+leather+journal) पड़ी है। बीस हजार रुपये बर्बाद किए मैंने इस पर। क्यों? ताकि मैं इसमें अपनी कुंठाओं को स्याही से उकेर सकूँ? नहीं, बल्कि इसलिए कि इसका ‘मूल्य’ मुझे यह भ्रम देता है कि मेरे विचार 10 रुपये के बॉलपेन से लिखने वाले क्लर्क से बेहतर हैं। यह शुद्ध मूर्खता है। यह डायरी मेरे अहंकार का एक महंगा ताबूत है।

एंट्रॉपी का विजय

अंततः, जिसे आप ‘प्रोफेशनल लाइफ’ कहते हैं, वह थर्मोडायनामिक्स के दूसरे नियम के खिलाफ एक हारी हुई लड़ाई है। आप व्यवस्था (Order) बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन ब्रह्मांड का स्वभाव अराजकता (Entropy) है। आप अपनी जीवन ऊर्जा को जलाकर कंपनी के बही-खातों में थोड़ा सा संतुलन लाते हैं, लेकिन बदले में अपने शरीर और आत्मा में अपूरणीय क्षति जमा करते हैं।

आप एक रिचार्जेबल बैटरी से ज्यादा कुछ नहीं हैं जिसका एनोड धीरे-धीरे क्षय हो रहा है। जिस दिन आपका वोल्टेज गिरेगा, आपको सिस्टम से निकालकर रीसाइकिल बिन में फेंक दिया जाएगा, और आपकी जगह कोई नई, सस्ती बैटरी ले लेगी। ज्यामितीय रूप से कहें तो, आप एक ऐसे कुएं में गिर रहे हैं जिसकी कोई तली नहीं है।

सर भारी हो रहा है। यह सब बकवास है। मुझे घर जाना है।

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