एन्ट्रॉपी का कसाईखाना

कॉरपोरेट नरक की ऊष्मागतिकी

सोमवार की सुबह, वातानुकूलित मीटिंग रूम में जो एक विशिष्ट प्रकार की ‘सड़न’ महसूस होती है, क्या तुमने कभी उस पर गौर किया है? यह तुम्हारे सहकर्मी के सस्ते डियोड्रेंट या कैफेटेरिया की बासी कॉफी की गंध नहीं है। यह एन्ट्रॉपी (Entropy) की गंध है। जिसे तुम अपनी ‘करियर प्रोग्रेस’ या ‘कॉरपोरेट कल्चर’ कहते हो, वह सांख्यिकीय यांत्रिकी (Statistical Mechanics) की नजर में केवल ब्रह्मांडीय कचरे का एक सुव्यवस्थित ढेर है। हम यहाँ काम नहीं कर रहे; हम बस ब्रह्मांड की आसन्न ऊष्मीय मृत्यु (Heat Death) में अपना छोटा सा, दयनीय योगदान दे रहे हैं।

बासी समोसे और सूचना का अपक्षय

किसी भी संगठन का जन्म एक ‘गर्मागर्म समोसे’ की तरह होता है—कम एन्ट्रॉपी, उच्च ऊर्जा, और एक स्पष्ट संरचना। लेकिन थर्मोडायनामिक्स का दूसरा नियम क्रूर और अपरिहार्य है। जैसे-जैसे समय बीतता है, वह समोसा ठंडा होता है, तेल सोखता है, और अंततः एक चिपचिपे, बेस्वाद मलबे में बदल जाता है जिसे हम ‘मिडिल मैनेजमेंट’ कहते हैं।

तुम्हारे बॉस का वह पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, जिसे बनाने में पूरी टीम ने रात काली की, वह जानकारी नहीं है; वह ऊष्मीय शोर (Thermal Noise) है। एक बंद प्रणाली (Closed System) में, विकार हमेशा बढ़ता है। 100 कर्मचारियों को एक कमरे में बंद करके ‘सिनर्जी’ की उम्मीद करना वैसा ही है जैसे कचरे के ढेर में आग लगाकर उम्मीद करना कि उसमें से गुलाब की खुशबू आएगी। हम जो ‘मीटिंग्स’ करते हैं, वे घर्षण (Friction) के अलावा कुछ नहीं हैं। तुम काम नहीं कर रहे हो, तुम बस गर्मी पैदा कर रहे हो जो अंततः वातावरण में विलीन हो जाएगी, और तुम्हारे हाथ लगेगा केवल शून्य।

विक्षेपी संरचनाएं और मरे हुए जानवर

नोबेल पुरस्कार विजेता इल्या प्रिगोगिन ने ‘विक्षेपी संरचनाओं’ (Dissipative Structures) की अवधारणा दी थी। जीवित रहने के लिए, एक प्रणाली को अपने भीतर की व्यवस्था बनाए रखने हेतु बाहर से ऊर्जा चूसनी पड़ती है और बाहर अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) फेंकनी पड़ती है। कॉरपोरेट जगत इसका सबसे वीभत्स उदाहरण है। कंपनी तुम्हारी जवानी, तुम्हारा समय और तुम्हारी मानसिक शांति (Low Entropy) को ईंधन की तरह जलाती है, और बदले में ‘तनाव’, ‘बर्नआउट’ और ‘तिमाही घाटे’ (High Entropy) को समाज में उगल देती है।

और हम इस शोषण को कैसे छुपाते हैं? विलासिता के आवरण से। तुम उस असली लेदर लैपटॉप बैग को ही देख लो, जिसे तुम अपनी ‘सफलता’ का प्रतीक मानकर कंधे पर लादे फिरते हो। पंद्रह से बीस हजार रुपये का मरे हुए जानवर का चमड़ा। इसे खरीदने के लिए तुमने अपनी रीढ़ की हड्डी घिस दी, अपनी नींद बेच दी। यह बैग तुम्हारे लैपटॉप को सुरक्षित रखने के लिए नहीं है; यह उस खोखलेपन को ढकने के लिए है जो तुम्हारी आत्मा में घर कर गया है। तुम एक जटिल मशीन के ‘कूलेंट’ हो, जिसे तब तक सर्कुलेट किया जाएगा जब तक तुम भाप बनकर उड़ नहीं जाते या गाद बनकर जम नहीं जाते।

फेज ट्रांजिशन: नौकरशाही का लकवा

जब एक स्टार्टअप बड़ा होता है, तो वह ‘तरल’ अवस्था से ‘ठोस’ अवस्था में फेज ट्रांजिशन (Phase Transition) से गुजरता है। पानी बर्फ बन जाता है। कल तक जो निर्णय एक चाय की टपरी पर हो जाते थे, आज उनके लिए दस कमिटियों की मंजूरी चाहिए। यह सूचना ज्यामिति (Information Geometry) का एक ‘अवरोध’ है।

संगठन अब काम नहीं करता, वह केवल अपनी जड़ता (Inertia) को बनाए रखने के लिए ऊर्जा की खपत करता है। यह एक ‘स्टोकैस्टिक रैंडम वॉक’ (Stochastic Random Walk) है—एक शराबी की तरह इधर-उधर गिरना, जिसे हम ‘रणनीतिक पिवट’ का नाम दे देते हैं। हर नया नियम, हर नई पॉलिसी, सिस्टम की नसों में जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल है। तुम आगे नहीं बढ़ रहे हो; तुम बस एक बहुत महंगी और सजावटी कब्र में धीरे-धीरे सड़ रहे हो।

सच कहूँ तो, यह सब बकवास है। मेरा दिमाग अब इस शोर को और नहीं झेल सकता। मुझे घर जाना है। नीचे नुक्कड़ पर छोले-कुलचे वाला खड़ा है; कम से कम उसके तेल में तैरते हुए प्याज के छल्लों में इस कॉरपोरेट पाखंड से ज्यादा ईमानदारी है। वह पेट भरता है, और तुम… तुम बस आत्मा खाते हो।

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