श्रम ज्यामिति

श्रम का ज्यामितीय भ्रम

श्रम नाम की यह उबाऊ और वीभत्स पुनरावृत्ति, जिसे तुम लोग ‘करियर’ या ‘जीवन का उद्देश्य’ कहकर महिमामंडित करते हो, गणितीय दृष्टिकोण से एक सांख्यिकीय बहुआयामी (Statistical Manifold) पर रेंगने वाले कीड़े की एक भद्दी लकीर के सिवा और कुछ नहीं है। यह कीचड़ में पड़े सिक्कों को बीनने की जद्दोजहद है, जिसे तुम ‘सफलता’ का नाम देते हो। सच तो यह है कि तुम ‘फिशर सूचना मीट्रिक’ (Fisher Information Metric) द्वारा निर्धारित एक कार्यात्मक स्थान (Functional Space) में सबसे छोटे रास्ते—यानी ‘शॉर्टेस्ट जियोडेसिक’ (Shortest Geodesic)—को खोजने के लिए हाथ-पैर मार रहे हो। और अब, जब तुम्हारे हाथ में एआई रूपी बैसाखी आ गई है, तो यह संघर्ष एक त्रासदी से बदलकर एक फूहड़ कॉमेडी बन गया है।

अस्तित्व का तुच्छ अनुकूलन

‘काम ही पूजा है’—यह वह अफीम है जो समाज तुम्हें इसलिए चटाता है ताकि तुम अपनी भूख को भूल सको। असलियत में, जिसे हम श्रम कहते हैं, वह केवल पेट भरने के लिए आटे-दाल के भाव और उसे हासिल करने में खर्च होने वाली ऊर्जा के बीच का एक नंगा नाच है। यह एक घिनौना अनुकूलन (Optimization) है। जरा सुबह की उस खचाखच भरी मेट्रो को याद करो, जिसमें तुम जानवरों की तरह ठुंसे होते हो। उस वक्त तुम्हारे दिमाग में जो चल रहा होता है—’कैसे अपनी ऊर्जा बचाऊं और बॉस की डांट से भी बचूं’—यही वह धूर्त गणना है जो तुम्हारे ‘कौशल मैनिफोल्ड’ की वक्रता (Curvature) तय करती है। यह कोई उच्च स्तरीय ज्यामिति नहीं है; यह महीने के आखिर में खत्म होते बैंक बैलेंस और मकान मालिक के तानों से बचने की छटपटाहट है। एआई के साथ तथाकथित ‘सहयोग’ और कुछ नहीं, बस इस रोजमर्रा की झल्लाहट और मानवीय शोर (Noise) को हटाकर, वेतन तक पहुँचने के रास्ते को छोटा करने की एक हताश कोशिश है। यह तुम्हारी जीत नहीं, जीवविज्ञान की हार है।

अनुपस्थित सूचना की कीमत

फिशर सूचना मीट्रिक की जटिलताओं में जाने की जरूरत नहीं है, बस इतना समझो कि तुम्हारा ‘हुनर’ एक अनिश्चित दुनिया में ‘अपेक्षित मूल्य’ (Expected Value) को छीनने की एक सांख्यिकीय जुआरी तकनीक है। एक पुराना कारीगर कहता था, ‘पत्थर पर लकीर पीटना’—यानी अनुभव। लेकिन आज के इस डिजिटल कसाईखाने में, वह ‘तीन साल की तपस्या’ केवल एंट्रॉपी (Entropy) की बर्बादी है। अगर एआई किसी काम को बिना पसीना बहाए, बिना भावना के, और बिना ‘चाय-सुट्टा ब्रेक’ के कर सकता है, तो तुम्हारी वर्षों की मेहनत का मूल्य शून्य है। मशीन के लिए, कौशल में महारत हासिल करना केवल ‘ग्रेडिएंट डिसेंट’ (Gradient Descent) द्वारा एक न्यूनतम त्रुटि बिंदु खोजना है। वहां न उंगलियों में दर्द होता है, न ही सोमवार की सुबह का अवसाद।

लेकिन तुम इंसान हो। तुम टूटते हो। तुम्हारी रीढ़ की हड्डी इस सूचनात्मक भार को सहने के लिए नहीं बनी थी। इसीलिए तुम अपनी शारीरिक सीमाओं को छिपाने के लिए बाज़ार में दौड़ते हो। तुम एर्गोनोमिक ऑफिस चेयर खरीदते हो, जिसकी कीमत तुम्हारे विवेक से भी ज्यादा हो सकती है। क्या विडंबना है! तुम डेढ़ लाख रुपये का प्लास्टिक और जाली का ढांचा इसलिए खरीदते हो ताकि तुम एआई द्वारा तय किए गए उस ‘जियोडेसिक’ रास्ते पर बैठकर अपनी कमर तुड़वा सको। यह आराम नहीं है; यह तुम्हारे शरीर द्वारा दी गई हार की स्वीकारोक्ति है, एक तरह का ‘सर्वाइवल टैक्स’ है जिसे तुम अपनी अप्रासंगिकता को कुछ साल और टालने के लिए चुका रहे हो। उस कुर्सी पर बैठकर, तुम धीरे-धीरे मांस के उस लोथड़े में बदल जाते हो जो केवल स्क्रीन को घूरने के लिए बना है।

परजीवी बुद्धि और पालतू पशु

‘एआई के साथ काम करना’—सुनने में कितना आधुनिक लगता है, है न? जैसे तुम किसी साथी के साथ हाथ मिला रहे हो। बकवास। यह साझेदारी नहीं, परजीविता है। तुम अपने दिमाग के ‘तर्क’ (Reasoning) वाले हिस्से को—जो सबसे भारी काम करता है—मशीन को आउटसोर्स कर रहे हो। तुम अब विचारक नहीं रहे; तुम बस एक ‘एक्जीक्यूट बटन’ दबाने वाले ऑपरेटर हो। जब एआई तुम्हें किसी समस्या का सबसे छोटा और सटीक समाधान दिखा देता है, तो तुम्हारा ‘गट फीलिंग’ या ‘अंतरात्मा की आवाज़’ कूड़ेदान में जाने लायक हो जाती है। इस ज्यामितीय वास्तविकता में, देर करना पाप है और अक्षमता एक लागत है।

खिड़की के बाहर देखो। वह डिलीवरी बॉय, जिसे एक ऐप बता रहा है कि किस गली से मुड़ना है—वह भविष्य का प्रतीक है। वह सोच नहीं रहा है; वह बस एक एल्गोरिथ्म का पालन कर रहा है। उसके और तुम्हारे बीच का अंतर मिट चुका है। तुम दोनों ही सूचना ज्यामिति के गुलाम हो, जो थर्मोडायनामिक संतुलन (Thermodynamic Equilibrium) की ओर बढ़ रहे हो। वहां कोई खुशी नहीं है, कोई ‘जॉब सैटिस्फैक्शन’ नहीं है। वहां बस ऊर्जा की न्यूनतम खपत है। कसाईखाने की कतार में खड़ी भेड़ भी शायद यही सोचती होगी कि उसकी अपनी एक पहचान है।

तो, अपनी उस महंगी कुर्सी पर ठीक से बैठ जाओ। एआई ने रास्ता दिखा दिया है। अब उस पर रेंगना शुरू करो। भूख लगी है न? तो रेंगो।

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