संगठित मृत्यु

विश्वविद्यालय के उन दमघोंटू गलियारों से निकलकर जब मैं इस सस्ते बार में बैठता हूँ, तो मुझे एक अजीब सी शांति मिलती है। मेरे सामने यह सस्ती व्हिस्की का गिलास है, और इसमें धीरे-धीरे पिघलती हुई बर्फ ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) का सबसे ईमानदार प्रदर्शन है। यह बर्फ अपनी पहचान खो रही है, पानी में मिल रही है, और अंततः एक बेस्वाद, कमरे के तापमान वाले द्रव में बदल जाएगी। ठीक यही हाल उन चमचमाती कॉर्पोरेट इमारतों का है जिन्हें आप ‘ऑर्गेनाइजेशन’ या ‘संस्था’ कहते हैं। लोग सोचते हैं कि मैनेजमेंट का मतलब चीजों को व्यवस्थित करना है। क्या बकवास है। सच तो यह है कि हर संगठन ‘एंट्रॉपी’ (Entropy) यानी अव्यवस्था की ओर धीमी गति से बढ़ने वाली एक शवयात्रा है। हम बस इस लाश को थोड़ा और सजाने-संवारने की कोशिश कर रहे हैं।

व्यवस्था का पाखंड

ब्रह्मांड का दूसरा नियम (Second Law of Thermodynamics) इतना क्रूर है कि उसे आपकी तिमाही रिपोर्ट या शेयरधारकों की भावनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह नियम कहता है कि हर बंद सिस्टम अंततः कचरे में बदल जाएगा। जब आपका सीईओ स्टेज पर खड़ा होकर ‘सिनर्जी’ और ‘लॉन्ग टर्म विज़न’ की बात करता है, तो वह असल में दिल्ली के उस पुराने ‘जुगाड़’ मैकेनिक जैसा लगता है जो टूटे हुए इंजन पर टेप चिपका कर कह रहा हो, ‘साहब, अभी और चलेगा।’ यह एक धोखा है। जिसे आप ‘कॉर्पोरेट कल्चर’ कहते हैं, वह असल में सड़न को छिपाने के लिए छिड़का गया महँगा रूम फ्रेशनर है।

एक जीवित तंत्र होने के नाते, संगठन को खुद को बिखरने से बचाने के लिए बाहर से लगातार ‘नेगेटिव एंट्रॉपी’—यानी ऊर्जा—चूसनी पड़ती है। और यह ऊर्जा क्या है? यह आपकी जवानी, आपका समय, और आपकी वह इच्छाशक्ति है जो रोज सुबह अलार्म बजने पर मर जाती है। आप सुबह की लोकल ट्रेन या मेट्रो में उन चेहरों को देखिए; वे इंसान नहीं हैं, वे बैटरी के सेल्स हैं जो डिस्चार्ज होने जा रहे हैं। ऑफिस में पहुँचकर, आप अपनी रीढ़ की हड्डी को उस महँगी एर्गोनोमिक कुर्सी पर टिका देते हैं, जिसकी कीमत शायद आपके होमटाउन के पूरे घर के राशन के बराबर होगी। आपको लगता है कि यह कुर्सी आपकी उत्पादकता बढ़ाएगी? जी नहीं, यह सिर्फ आपके शरीर को उस स्थिति में आरामदायक बनाए रखने का एक षड्यंत्र है, जहाँ आपकी आत्मा धीरे-धीरे एक्सेल शीट्स के बीच दम तोड़ सके। यह आराम नहीं, यह एनेस्थीसिया है।

ऊर्जा की बर्बादी और चूहे

सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के नजरिए से देखें, तो एक ‘निर्णय’ (Decision) लेना असल में शोर (Noise) के समुद्र में से एक सिग्नल ढूँढने की कोशिश है। लेकिन कॉर्पोरेट जगत में हम सिग्नल नहीं ढूँढते, हम सिर्फ और शोर पैदा करते हैं। उन अंतहीन बैठकों के बारे में सोचिए। दस लोग एक कमरे में बंद हैं, एयर कंडीशनर की भनभनाहट है, और प्रोजेक्टर पर कुछ ऐसे आँकड़े हैं जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। यह वैसा ही है जैसे दस भूखे लोग एक कटोरी ‘मैगी’ को घूर रहे हों, जिसे इतना उबाला गया है कि वह अब नूडल्स नहीं, बल्कि एक लसदार लेई बन चुकी है। कोई उसे खाना नहीं चाहता, पर सब तारीफ कर रहे हैं।

इस प्रक्रिया में जो घर्षण पैदा होता है—जो राजनीति, चुगलखोरी और ईमेल्स की तू-तू मैं-मैं होती है—वह सब ‘वेस्ट हीट’ (Waste Heat) है। एक इंजन जितना खराब होता है, वह उतना ही ज्यादा शोर और गर्मी पैदा करता है और काम कम करता है। आपके ऑफिस का माहौल इतना जहरीला इसीलिए है क्योंकि सिस्टम की दक्षता (Efficiency) शून्य के करीब है। आप अपने कानों पर वे प्रीमियम नॉइज़ कैंसिलिंग हेडफोन चढ़ा लेते हैं, यह सोचकर कि दुनिया का शोर बंद हो जाएगा। कितनी विडंबना है! आप शांति को पैसे से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वह शोर आपके अंदर चल रहा है। वह हेडफोन आपको बाहरी आवाजों से तो बचा सकता है, लेकिन उस आंतरिक चीख से नहीं जो कह रही है कि ‘मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?’

धीमी सड़न

अंततः, हर सिस्टम ‘ब्यूरोक्रेसी’ के ब्लैक होल में गिर जाता है। यह वह अवस्था है जहाँ मशीन को ठंडा रखने के लिए ही सारा ईंधन जल जाता है और गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ती। यह एक थर्मल डेथ (Thermal Death) है। क्या आपने कभी सरकारी दफ्तर में किसी पुरानी फाइल को एक मेज से दूसरी मेज तक जाते देखा है? वह गति नहीं है, वह ब्राउनियन मोशन (Brownian Motion) है—कणों की यादृच्छिक हलचल जिसका कोई उद्देश्य नहीं होता।

हम सब उस बस स्टॉप पर खड़े हैं जहाँ बस कभी नहीं आएगी, लेकिन हम लाइन से हटने से डरते हैं क्योंकि हमने इंतजार में इतना समय निवेश कर दिया है। इसे ‘संक कॉस्ट फैलेसी’ (Sunk Cost Fallacy) कह लीजिए या शुद्ध मूर्खता। हम बैठकों में सिर हिलाते रहेंगे, पीपीटी बनाते रहेंगे, और खुद को यह झूठ बोलते रहेंगे कि हम कुछ ‘बड़ा’ कर रहे हैं। जबकि असलियत में, हम सिर्फ ब्रह्मांडीय मलबे का हिस्सा बन रहे हैं।

उफ्फ, मेरा गिलास खाली हो गया है और वेटर भी मेरी तरफ ऐसे देख रहा है जैसे मैं कोई अनचाहा बग (Bug) हूँ। सर दर्द हो रहा है। घर जाना है।

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