ऊष्मागतिकी, पसीना और गटर की भौतिकी
पिछली बार जब हम ‘करियर’ नाम के उस सड़े हुए मलबे और तुम्हारी तथाकथित योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे, तो मैंने कहा था कि तुम्हारी महत्वाकांक्षाएं उस अंधे भिखारी की तरह हैं जो हवा में महल बनाने के सपने देख रहा है। आज, उस रंगीन तमाशे की चीर-फाड़ करते हैं जिसे आधुनिक समाज ‘स्टार्टअप’ कहता है। लोग इसे ‘नवाचार’ या ‘क्रांति’ कहते हैं, लेकिन अगर तुम अपनी आंखों से कॉरपोरेट की पट्टी हटाकर देखो, तो यह केवल ‘नॉन-इक्विलिब्रियम ओपन सिस्टम’ (Non-equilibrium Open System) का एक भद्दा और घिनौना प्रदर्शन है।
हकीकत यह है कि तुम्हारा यह धंधा इल्या प्रिगोगिन के ‘डिसिपेटिव स्ट्रक्चर्स’ (Dissipative Structures) के सिद्धांत का एक बदबूदार उदाहरण मात्र है। यह कोई व्यवसाय नहीं है, यह ब्रह्मांड के कठोर नियमों के खिलाफ खेला गया एक जुआ है। तुम एक ऐसी मशीन चला रहे हो जो केवल शोर और कचरा पैदा करने के लिए बनी है।
लालच की आग और जलता हुआ पैसा
एक स्टार्टअप क्या है? यह ऊर्जा सोखने वाला एक ऐसा भूखा राक्षस है जिसका पेट कभी नहीं भरता। यहाँ ‘ऊर्जा’ का मतलब भौतिकी की किसी स्वच्छ और पवित्र परिभाषा से नहीं है; इसका मतलब है वेंचर कैपिटलिस्टों (VCs) का वो पैसा जो उन्होंने दूसरों का खून चूसकर और सट्टेबाजी करके कमाया है। तुम इस पैसे को अपनी भट्टी में झोंकते हो ताकि अपने भीतर की उस गंदगी—जिसे वैज्ञानिक ‘एंट्रॉपी’ (Entropy) कहते हैं और हम देसी भाषा में ‘रायता फैलना’ कहते हैं—को बाहर फेंक सको।
ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) का दूसरा नियम एक जल्लाद की तरह तुम्हारे सिर पर खड़ा है। वह कहता है कि हर बंद प्रणाली अंततः सड़ेगी, बिखरेगी और खत्म हो जाएगी। तुम्हारी कंपनी भी उसी ‘ऊष्मीय मृत्यु’ (Heat Death) की ओर बढ़ रही है। तुम जिसे ‘ग्रोथ’ या विकास का नाम देते हो, वह दरअसल मौत के खिलाफ एक हताश और महंगी चीख है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक भुक्कड़ आदमी किसी बुफे में इस उम्मीद में खाना ठूंस रहा हो कि उसके खाने की गति, उसके मरने की गति से तेज होगी। जिस पल तुम बाहर से पैसा—जिसे हम ‘नेगेटिव एंट्रॉपी’ कह सकते हैं—खींचना बंद कर दोगे, तुम्हारी यह कांच की इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। तुम उस स्मार्टफोन की तरह हो जिसकी बैटरी फूल चुकी है, जो चार्जिंग पर न लगाने पर तुरंत मर जाता है, और चार्जिंग पर लगाने पर मुंह पर फटने का खतरा बना रहता है।
कचरे का ढेर और रीढ़हीन बादशाह
प्रिगोगाइन ने सिखाया था कि जटिलता केवल वहीं पनपती है जो संतुलन से कोसों दूर हो। लेकिन तुम्हारे ऑफिस की यह ‘जटिलता’ कोई महान रचना नहीं है। यह केवल अंतहीन, बेमतलब की मीटिंग्स का शोर है, जहाँ लोग अपनी नौकरी बचाने के लिए एक-दूसरे के चेहरे पर मुस्कुराहट का मुखौटा लगाकर झूठ बोलते हैं। जैसे-जैसे एक स्टार्टअप ‘स्केल’ करता है, वह उतना ही ज्यादा कचरा पैदा करता है—चाहे वह फालतू का डेटा हो, स्लैक (Slack) पर चल रही बकवास हो, या वे मिडिल-मैनेजमेंट के कर्मचारी जो दिन भर केवल यह दिखाने का नाटक करते हैं कि वे बहुत व्यस्त हैं।
यह सब एक सामूहिक मानसिक बीमारी है। जब ‘बर्न रेट’ (Burn Rate) बढ़ता है और हकीकत का दबाव तुम्हारी कमर तोड़ने लगता है, तब तुम समाधान नहीं ढूंढते। तुम बस आराम ढूंढते हो। तुम अपनी अक्षमता और डर को छिपाने के लिए उस डेढ़ लाख रुपये की एर्गोनोमिक कुर्सी (Ergonomic Chair) में धंस जाते हो। तुम्हें लगता है कि एक मेश-बैक वाली महंगी कुर्सी पर बैठकर, जिसमें लम्बर सपोर्ट है, तुम्हारी खोखली रणनीतियां अचानक ठोस हो जाएंगी। यह ठीक वैसा ही है जैसे गटर के ऊपर मखमली कालीन बिछा देना ताकि बदबू न आए। वह कुर्सी तुम्हारी सफलता का सिंहासन नहीं है, जनाब; वह तुम्हारी रीढ़ की हड्डी के टूटने और तुम्हारे दिमाग के दिवालिएपन का सबसे महंगा सबूत है। जितना विशाल तुम्हारा संगठन होता है, उतनी ही ज्यादा ऊर्जा केवल खुद को जिंदा रखने में, खुद का वजन उठाने में बर्बाद होती है। अंत में, कंपनी एक ऐसे मोटे जीव में बदल जाती है जो केवल इसलिए सांस ले रहा है ताकि वह अगले पांच मिनट और जिंदा रह सके।
मौत की शांति और आखिरी डकार
सूचना ज्यामिति (Information Geometry) की बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, लेकिन हकीकत में तुम्हारा स्टार्टअप प्रकृति के कोड में आया हुआ एक ‘बग’ (Bug) है जिसे ब्रह्मांड ठीक करने की कोशिश कर रहा है। प्रकृति को संतुलन पसंद है, उसे सन्नाटा पसंद है। और व्यापार में संतुलन का मतलब है ‘मौत’। एक पूरी तरह से संतुलित कंपनी वह है जिसका कोई वजूद नहीं है—न कोई ग्राहक, न कोई ड्रामा, न कोई लाभ, न कोई तुम।
जिसे तुम ‘प्रगति’ कहकर पूजते हो, वह दरअसल समय के साथ की गई एक छोटी सी डकैती है। हम एन्ट्रापी के समुद्र में एक अस्थायी द्वीप बनाते हैं और उसे ‘मार्केट शेयर’ कहते हैं। लेकिन याद रखना, ब्रह्मांड बहुत बेरहम मुनीम है; वह पाई-पाई का हिसाब लेगा। आज जो कंपनी ‘यूनिकॉर्न’ बनकर चमक रही है, कल वह इतिहास के कूड़ेदान में किसी फटे हुए टायर की तरह पड़ी होगी, अपनी सारी ऊर्जा ब्रह्मांड को वापस लौटा चुकी होगी। तुम्हारी रात भर की कोडिंग, तुम्हारी वो बेकार की ‘पिच डेक’ और तुम्हारी वो कृत्रिम हंसी—सब कुछ उस ठंडी, नीरस समानता में विलीन हो जाएगा।
यह कोई मोटिवेशनल भाषण नहीं है, यह एक शव-परीक्षण (Autopsy) है। तुम एक बुलबुला हो। और बुलबुले का धर्म केवल एक ही है—फूटना। बस फर्क इतना है कि कुछ बुलबुले फूटने से पहले थोड़ा ज्यादा गंदा पानी उछालते हैं। जाओ, घर जाकर सो जाओ, वैसे भी तुम्हारी इस भागदौड़ से ब्रह्मांड की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
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