पिछले लेख में ‘दक्षता’ (Efficiency) के जिस भ्रमजाल को हमने उधेड़ा था, वह तो महज एक हल्की खरोंच थी। आज जरा उस ‘श्रम’ (Labor) की चीर-फाड़ करते हैं जिसे तुम अपनी ‘करियर ग्रोथ’ का नाम देते हो। हकीकत यह है कि यह तुम्हारी हड्डियों और न्यूरॉन्स के धीरे-धीरे गलने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसे तुम ‘सैलरी स्लिप’ के नशे में अनदेखा कर देते हो।
अस्तित्व: पसीने से चलती सड़ती हुई मशीन
आधुनिक कॉर्पोरेट जगत को ‘मूल्य सृजन’ का पवित्र मंदिर कहना बंद करो। भौतिकी की निष्ठुर निगाहों से देखो, तो तुम और तुम्हारे क्यूबिकल में बैठा वह सहकर्मी, जो जोर-जोर से कीबोर्ड पीट रहा है, केवल ‘हीट इंजन’ (Heat Engines) हो। तुम सुबह की बासी चाय और सस्ते कार्बोहाइड्रेट्स को ईंधन की तरह अपने अंदर झोंकते हो, और उसे ‘वीकली रिपोर्ट्स’ नामक धुएँ में बदल देते हो। विद्वान इसे ‘散逸構造’ (Dissipative Structure) कहते हैं, लेकिन सड़क की भाषा में यह एक ऐसा चूल्हा है जो तभी तक जलता है जब तक उसमें तुम्हारी जवानी की लकड़ियाँ फेंकी जाती हैं।
एक संगठन (Organization) को जीवित रहने के लिए लगातार संसाधनों की बलि देनी पड़ती है, ताकि वह अपने अंदर की उस सड़न—जिसे विज्ञान ‘एन्ट्रॉपी’ कहता है—को कुछ देर के लिए टाल सके। क्या तुमने कभी रविवार की शाम को अपने पेट में होने वाली उस अजीब सी ऐंठन पर गौर किया है? वह तुम्हारी व्यक्तिगत एन्ट्रॉपी है। वह जानती है कि सोमवार सुबह तुम्हें फिर उसी मशीन का पुर्जा बनना है जो तुम्हारी आत्मा को चबाकर कॉन्फ्रेंस रूम की लाइटें जलाए रखती है। एक भूखा कुत्ता जब सूखी हड्डी चबाता है, तो अपने ही मसूड़ों से निकलते खून के स्वाद को हड्डी का रस समझकर आनंद लेता है। तुम्हारा ‘जॉब सेटिस्फेक्शन’ भी ठीक वैसा ही है—अपनी ही जीवन-ऊर्जा को जलाकर तुम उस गर्मी को ‘सफलता’ का नाम देते हो।
कोलाहल: सड़े हुए सिस्टम का गणित
अगर तुम्हें मुगालता है कि बोर्ड मीटिंग्स और ‘स्ट्रेटेजिक प्लानिंग’ किसी महान विजन का हिस्सा हैं, तो तुम मूर्खता के हिमालय पर बैठे हो। जिसे तुम ‘ऑर्गेनाइजेशनल डायनामिक्स’ कहते हो, वह दरअसल एक बंद नाली की तरह है जिसमें मानवीय अहंकार का कचरा फंस गया है। जब तुम्हारा मैनेजर स्क्रीन पर चिल्लाता है या बेवजह की अर्जेंसी पैदा करता है, तो वह किसी लक्ष्य को नहीं साध रहा; वह केवल सिस्टम की ‘फ्री एनर्जी’ को नियंत्रित करने का एक भद्दा नाटक कर रहा है। वह घर्षण, वह ऑफिस पॉलिटिक्स, वह एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़—यह सब वह ‘वेस्ट हीट’ (Waste Heat) है जो तब पैदा होती है जब इंसानी जज्बात और मशीन जैसी तार्किकता आपस में टकराकर चिंगारियां छोड़ते हैं।
तुम्हारे दिमाग का ‘न्यूरल नेटवर्क’ विकास के क्रम में केवल एक ही चीज के लिए बना है: ‘सरप्राइज’ यानी झटके को कम करना। कार्ल फ्रिस्टन का ‘फ्री एनर्जी प्रिंसिपल’ सुनने में जितना बौद्धिक लगता है, असलियत में वह एक डरे हुए मध्यमवर्गीय कर्मचारी की चीख है जो हर महीने की आखिरी तारीख को अपने बैंक बैलेंस को घूरता है। हम काम इसलिए नहीं करते कि हम कुछ नया रचना चाहते हैं; हम काम इसलिए करते हैं क्योंकि हम अनिश्चितता के उस भयानक अंधेरे से डरे हुए हैं। हम डेटा, एक्सेल शीट्स और पावरपॉइंट के पहाड़ खड़े करते हैं ताकि खुद को यह झूठा दिलासा दे सकें कि दुनिया हमारे नियंत्रण में है।
विडंबना यह है कि इस नियंत्रण के भ्रम को मापने के लिए तुम अपनी कलाई पर बंधी उस महंगी मैकेनिकल घड़ी को बार-बार देखते हो। वह तुम्हें समय नहीं बताती, बल्कि यह याद दिलाती है कि तुम्हारी नश्वरता का हर सेकंड कितना कीमती और अपरिवर्तनीय है, जिसे तुम कोड़ियों के दाम बेच रहे हो। उसकी वह निरंतर ‘टिक-टिक’ दरअसल तुम्हारी कब्र खोदने वाले फावड़े की आवाज़ है, जिसे तुम लक्जरी समझते हो। जितनी अधिक तुम व्यवस्था बनाने की कोशिश करोगे, उतनी ही अधिक गंदगी फैलेगी—यह थर्मोडायनामिक्स का अटल नियम है। तुम अपनी मेज साफ़ करते हो, लेकिन वह धूल तुम्हारे फेफड़ों में या किसी और के केबिन में चली जाती है। कॉर्पोरेट सफलता केवल अव्यवस्था को एक मेज से दूसरी मेज पर धकेलने की कला है।
अनुमान: एक विफल भविष्य की भविष्यवाणी
‘बिजनेस कंटिन्यूटी’ (Business Continuity)? यह शब्द सुनकर ही हंसी आती है। तुम एक ऐसे पहाड़ की चोटी पर बैठकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हो जो खुद दलदल में धंस रहा है। जीवित प्रणालियाँ ‘वेरिएशनल फ्री एनर्जी’ को कम करने के लिए संघर्ष करती हैं, जिसका सीधा सा मतलब है कि तुम अपने बॉस के मूड और मार्केट के उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी करके अपने अस्तित्व को थोड़ा और लंबा खींचना चाहते हो।
‘नौकरी की सुरक्षा’ (Job Security) एक सामूहिक मानसिक बीमारी है। तुम ईमेल भेजते हो, ‘कोलेबोरेशन’ का ढोंग करते हो, और खुद को एक ‘असेट’ मानते हो। लेकिन ब्रह्मांडीय पैमाने पर, तुम्हारा हर ‘सफल प्रोजेक्ट’ दुनिया की कुल एन्ट्रॉपी को बढ़ा रहा है। तुम्हारा काम व्यवस्था नहीं बना रहा; वह केवल विनाश की गति को थोड़ा और व्यवस्थित बना रहा है। जैसे घर की सारी गंदगी को सोफे के नीचे छिपा देने से घर साफ़ नहीं हो जाता, वैसे ही तुम्हारी ‘तिमाही रिपोर्ट’ दुनिया को बेहतर नहीं बना रही, बस तबाही को थोड़ा अदृश्य कर रही है।
अंत में, हम सभी उस ‘हीट डेथ’ (Heat Death) की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ न तो तुम्हारा ‘इंक्रीमेंट’ मायने रखेगा और न ही तुम्हारी ‘लीडरशिप क्वालिटी’। तब तक, उस महंगी घड़ी की सुइयों को घूमते हुए देखते रहो और खुद को धोखा देते रहो कि तुम कुछ सार्थक कर रहे हो। खैर, मुझे भूख लगी है और यह सोचकर ही घृणा हो रही है कि मेरा पेट भी इस समय थर्मोडायनामिक्स के उन्हीं घटिया नियमों के अधीन है。
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