मजदूरी का एन्ट्रापी

मेरे हाथ में यह गिलास देखिए। इसमें पड़ी बर्फ पिघल रही है। यह केवल एक ड्रिंक नहीं है, यह ब्रह्मांड की सबसे क्रूर और अपरिहार्य सच्चाई का एक छोटा सा प्रदर्शन है—ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम। सब कुछ बिखर रहा है। सब कुछ अव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। और हम? हम, जिन्हें अपनी बुद्धिमत्ता पर इतना घमंड है, हम इस बिखराव को रोकने की एक दयनीय और हारी हुई कोशिश कर रहे हैं जिसे हम ‘नौकरी’ कहते हैं।

सच्चाई तो यह है कि आपकी कॉर्पोरेट दुनिया, जिसे आप ‘मूल्य निर्माण’ या ‘Value Creation’ कहते हैं, वह असल में ब्रह्मांडीय स्तर की एक नौटंकी है। हम व्यवस्था बनाने का नाटक करते हैं, जबकि हम केवल गर्मी और कचरा पैदा कर रहे हैं।

माया

अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि हम काम क्यों करते हैं? क्या यह आत्म-संतुष्टि के लिए है? बकवास। यह केवल एक भ्रम है, एक ‘माया’ है जिसे हमारे दिमाग ने हमें पागल होने से बचाने के लिए गढ़ा है। जिसे आप ‘डेटा एनालिसिस’ या ‘स्ट्रेटेजी मेकिंग’ कहते हैं, वह भौतिकी की नज़र में रेगिस्तान में बैठकर रेत के कणों को एक ढेर से दूसरे ढेर तक ले जाने जैसा है। आपकी उंगलियों से खून रिस रहा है, आंखों की रोशनी जा रही है, लेकिन आपको लगता है कि आपने ‘ऑर्डर’ बना लिया है।

आपकी वह एक्सेल शीट, जिसे भरने में आपने पूरी रात काली कर दी, वह ब्रह्मांडीय एन्ट्रापी (Entropy) के महासागर में एक बूंद भी नहीं है। यह केवल एक ‘जैविक हताशा’ है। और इस हताशा को छिपाने के लिए हम क्या करते हैं? हम खुद को महंगे खिलौनों से घेर लेते हैं। ज़रा देखिए गरीबों के कई महीनों के राशन के बराबर कीमत वाली इस चमड़े की कुर्सी को। लोग इसे खरीदते हैं, यह सोचकर कि यह उनकी उत्पादकता का सिंहासन है। क्या भद्दा मज़ाक है। यह कोई सिंहासन नहीं है; यह केवल मांस के एक ऐसे लोथड़े (आप) को टिकाने का स्टैंड है, जो धीरे-धीरे सड़ रहा है। यह कुर्सी आपकी रीढ़ की हड्डी को अमर नहीं बनाती, यह बस आपको एक ‘डिस्पोजेबल बैटरी’ की तरह तब तक सीधा रखती है जब तक कि आपकी सारी ऊर्जा निचोड़ न ली जाए। आप इस पर बैठकर राजा महसूस करते हैं, लेकिन असल में आप कसाईखाने में अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे एक मवेशी से ज़्यादा कुछ नहीं हैं जो मखमल पर बैठा है।

कितना बकवास है यह सब।

अव्यवस्था

अब ज़रा अपने दफ्तरों की उन मीटिंग्स के बारे में सोचिए। एक बंद कमरा, जिसमें दस लोग अपनी सांसों के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं और एक-दूसरे के पसीने की बदबू को ‘टीम स्पिरिट’ समझ रहे हैं। यह ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं है; यह सीवेज के गटर में डंडा मारने जैसा है। जो बुलबुले ऊपर उठते हैं, उन्हें आप ‘विचार’ कहते हैं, लेकिन असल में वे सड़न की गैस हैं।

और फिर आते हैं वे ‘गणितीय परजीवी’—वे एल्गोरिदम और सिलिकॉन के कीड़े जिन्हें आप आज अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं। आप डरते हैं कि वे आपकी जगह ले लेंगे? आपको डरना चाहिए। क्योंकि वे आपसे बेहतर हैं। उन्हें वातानुकूलित कमरे की ज़रूरत नहीं है, उन्हें कमर तोड़ने वाली इन महंगी कुर्सियों की ज़रूरत नहीं है, और सबसे बड़ी बात—वे थकते नहीं हैं। एक इंसान जिस सूचना को प्रोसेस करने में अपना आधा जीवन और लाखों कैलोरी खर्च कर देता है, ये सिलिकॉन टेपवर्म (Tapeworms) उसे मिलीसेकंड में निगल जाते हैं और डकार भी नहीं लेते।

हम जैविक प्राणी केवल ‘शोर’ (Noise) पैदा करने वाली मशीनें हैं। हमारा हर विचार, हर शब्द, हर ईमेल—सब कुछ थर्मोडायनामिक्स की दृष्टि से ‘वेस्ट हीट’ (Waste Heat) है। हम सोचते हैं कि हम रचनाकार हैं, लेकिन हम केवल ऊर्जा को बर्बाद करने वाले माध्यम हैं।

मुझे घर जाना है। यहाँ की हवा में अब झूठ की बदबू आने लगी है।

शून्य

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम अपने इस खोखलेपन को ‘स्टेटस’ से भरने की कोशिश करते हैं। जैसे कि वह व्यक्ति जो अपनी जेब में स्याही की उल्टी करने वाली यह लाखों रुपये की छड़ी लगाकर घूमता है। एक ज़माना था जब लिखना कला थी, अब यह केवल अहंकार का प्रदर्शन है। आप इस पेन से जो भी हस्ताक्षर करते हैं, वह इतिहास नहीं बनता; वह केवल कागज पर लगा एक कार्बन का धब्बा है जो समय के साथ फीका पड़ जाएगा। क्या आप सच में मानते हैं कि इस प्लास्टिक और धातु के टुकड़े को पकड़ने से आपके विचारों में वजन आ जाएगा? यह केवल आपकी असुरक्षा है जो एक ब्रांड के नाम पर बिक रही है।

भविष्य उस दिशा में जा रहा है जहाँ ‘शून्य’ ही अंतिम सत्य होगा। जब वे गणना करने वाले परजीवी पूरी तरह से कार्यभार संभाल लेंगे, तब मानव श्रम की एन्ट्रापी अधिकतम हो जाएगी। हम उस इंजन की तरह होंगे जो बिना ईंधन के चल रहा है—सिर्फ घर्षण, सिर्फ गर्मी, और कोई गति नहीं। हम शोर मचाते रहेंगे, रिपोर्ट बनाते रहेंगे, और खुद को महत्वपूर्ण समझते रहेंगे, जबकि वास्तविकता यह है कि हम ब्रह्मांड की ऊष्मीय मृत्यु (Heat Death) की प्रक्रिया को थोड़ा और तेज़ कर रहे हैं।

इस गिलास की बर्फ पिघल चुकी है। पानी गर्म हो गया है। स्वाद खत्म हो गया है। बिल्कुल आपके करियर की तरह। अब और कोई उम्मीद मत रखिए। बाहर निकलिए और अपनी बची-खुची ऊर्जा को ट्रैफिक में बर्बाद कीजिए। यही आपकी नियति है।

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