सड़ी हुई वसा और पसीने का भ्रम
जिस पल आप ‘लोक कल्याण’ या ‘कॉर्पोरेट मूल्य’ जैसे शब्दों का उच्चारण करते हैं, आप गणितीय वास्तविकता के चेहरे पर थूक रहे होते हैं। समाज कोई जीवित, सांस लेने वाला जीव नहीं है जिसे आपकी सहानुभूति या मेहनत की आवश्यकता है। यह सूचना ज्यामिति (Information Geometry) का एक विशाल, ठंडा मैनिफोल्ड (Manifold) है, जहाँ आपकी तथाकथित ‘सफलता’ केवल एक सांख्यिकीय त्रुटि है। सुबह की लोकल ट्रेन या मेट्रो के दरवाजे खुलने पर जो बासी पसीने, सस्ते डियोड्रेंट और हताशा की मिली-जुली बदबू आपके नथुनों से टकराती है, वही आपके अस्तित्व का असली ‘सुगंध’ है।
स्टेशन के बाहर उस समोसे वाले की कढ़ाई को ध्यान से देखें। उसमें खौलता हुआ तेल, जो बार-बार गर्म होने से काला और गाढ़ा हो चुका है, ठीक वही पदार्थ है जिससे आपका ‘करियर’ बना है। आप जिसे ‘अनुभव’ कहते हैं, वह वास्तव में वह ऑक्सीकृत वसा (Oxidized Fat) है जो आपकी आत्मा की धमनियों को तब तक ब्लॉक करती है जब तक कि आप पूरी तरह से बेकार न हो जाएं। यह सोचना कि फाइलों को इधर-उधर खिसकाने से आप ब्रह्मांड की एन्ट्रापी (Entropy) को कम कर रहे हैं, ठीक वैसा ही है जैसे उस विषैले तेल में तली हुई चीजों को खाकर यह मानना कि आपको पोषण मिल रहा है। असल में, आप केवल इस महँगे मैकेनिकल कीबोर्ड पर अपनी उंगलियों को नचाकर शोर पैदा कर रहे हैं। हर ‘क्लिक’ एक खाली गूँज है, जो यह साबित करती है कि आप अभी भी मशीन का हिस्सा हैं, लेकिन यह शोर किसी भी तरह से उत्पादकता नहीं है—यह केवल घर्षण है।
वक्रता का कारागार
मूल्य निर्माण (Value Creation) का पूरा सिद्धांत एक झूठ है। सूचना ज्यामिति की दृष्टि से, एक संगठन का उद्देश्य केवल संभाव्यता वितरण (Probability Distribution) के बीच की दूरी को मापना है, जिसे फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक (Fisher Information Metric) कहते हैं। जिसे आप ‘प्रबंधन की दूरदर्शिता’ कहते हैं, वह केवल डेटा के महासागर में एक जियोडेसिक (Geodesic) पथ खोजने की यांत्रिक प्रक्रिया है। यहाँ मानवीय अंतर्ज्ञान के लिए कोई जगह नहीं है। ‘इनोवेशन’ का अर्थ है उस वक्रता (Curvature) को थोड़ा सा मोड़ना, ताकि श्रमिक उस पर फिसलते रहें और कभी भी अपनी जगह से बाहर न निकल सकें।
आप अपनी डेस्क को सजाने के लिए चाहे जितनी भी मेहनत कर लें, ज्यामिति निर्दयी होती है। जब आप डेढ़ लाख रुपये की उस एर्गोनोमिक कुर्सी पर बैठते हैं, तो आपको लगता है कि यह आपकी रीढ़ की हड्डी को सहारा दे रही है। कितनी भोली सोच है। वह कुर्सी वास्तव में एक शिकंजा है, जिसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि आप अपनी जगह पर जमे रहें और सिस्टम आपकी रीढ़ से सीधे ‘कार्यक्षमता’ चूस सके। उस कुर्सी का हर वक्र, हर कुशन, आपको यह भ्रम देने के लिए है कि आप एक राजा हैं, जबकि वास्तव में आप एक बैटरी हैं जिसे धीरे-धीरे निचोड़ा जा रहा है। एआई (AI) या स्वचालित एल्गोरिदम का उदय कोई क्रांति नहीं है; यह केवल इस वक्रता को और अधिक चिकना बनाने की प्रक्रिया है, ताकि आपको यह भी महसूस न हो कि कब आपको समीकरण से बाहर निकाल दिया गया।
अस्तित्व का वाष्पीकरण
अंततः, ‘व्यक्ति’ जैसी कोई चीज नहीं बचती। आप एक कर्ता (Agent) नहीं हैं; आप केवल एक चर (Variable) हैं जिसे अनुकूलन समस्या (Optimization Problem) में डाला गया है। जिस तरह एक पुराना सस्ता स्मार्टफोन समय के साथ फूलने लगता है और उसकी स्क्रीन अंदर के दबाव से बाहर निकल आती है, वैसे ही संगठनों के भीतर का भ्रष्टाचार और अक्षमता उनकी सूचनात्मक गिरावट है। आपकी भावनाएं—गुस्सा, खुशी, वफादारी—इस मशीन में केवल थर्मल नॉयज (Thermal Noise) हैं।
सिस्टम को आपकी वफादारी नहीं चाहिए, उसे केवल आपका डेटा चाहिए। जब तक आपका ‘वजन’ (Weight) और ‘पूर्वाग्रह’ (Bias) मॉडल में फिट बैठते हैं, आपको रखा जाएगा। जिस दिन गणितीय ढलान (Gradient Descent) को लगेगा कि आप न्यूनतम (Local Minima) तक पहुँचने में बाधा बन रहे हैं, आपको हटा दिया जाएगा। यह कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है; यह शुद्ध गणित है।
अब घर जाने का नाटक बंद करें। आप जिस ‘घर’ की ओर भाग रहे हैं, वह भी केवल उपभोग का एक और केंद्र है, जहाँ आप अपनी बची-खुची ऊर्जा को स्क्रीनों और विज्ञापनों पर खर्च करेंगे। ज्यामिति पूर्ण हो चुकी है। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
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