क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह की उस खचाखच भरी लोकल ट्रेन में, जहाँ किसी अजनबी की कोहनी आपकी पसलियों में धंसी होती है और हवा में सस्ते डियोडरेंट और बासी पसीने का मिश्रण तैर रहा होता है, आप वास्तव में क्या कर रहे हैं? दुनिया, और विशेष रूप से लिंक्डइन के ‘मोटिवेशनल गुरु’, आपसे कहेंगे कि आप ‘करियर’ बना रहे हैं या अपने ‘सपनों’ का पीछा कर रहे हैं। बकवास। यह सब खुद को तसल्ली देने का एक सस्ता नशा है। अगर आप इन भावनात्मक परतों को खुरच कर देखेंगे, तो पाएंगे कि आप केवल एक जैविक मशीन हैं जो ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम (Second Law of Thermodynamics) से हारने से इनकार कर रही है। सादे शब्दों में कहें तो, आपकी वह 9-से-5 की नौकरी और वह बेमतलब की पीपीटी स्लाइड ब्रह्मांड की बढ़ती हुई अराजकता, यानी एन्ट्रॉपी (Entropy) के खिलाफ एक हताश और महंगी जंग है।
श्रम का भौतिकी
लोग अक्सर ‘हार्ड वर्क’ या ‘कड़ी मेहनत’ की बात ऐसे करते हैं जैसे कि यह कोई महान नैतिक गुण हो। सच तो यह है कि श्रम केवल ‘नेगेटिव एन्ट्रॉपी’ (Negative Entropy) का एक इंजेक्शन है। ब्रह्मांड का डिफ़ॉल्ट स्वभाव बिखरना है। आपकी मेज पर पड़ी फाइलें अपने आप व्यवस्थित नहीं होंगी; आपका बेडरूम अपने आप साफ नहीं होगा; और वह एक्सेल शीट खुद को नहीं भरेगी। इसके लिए ऊर्जा चाहिए। और वह ऊर्जा कहाँ से आती है? आपकी जवानी, आपकी मानसिक शांति और आपके समय से। ऑफिस में होने वाला हर झगड़ा, हर बेतुकी मीटिंग, दरअसल उस सिस्टम की सड़न को रोकने की कोशिश है जो प्राकृतिक रूप से कचरे के ढेर में बदल जाना चाहता है। इसे एक समोसे के उदाहरण से समझिए। कड़ाही से निकला एक ताज़ा समोसा 'निम्न एन्ट्रॉपी' की स्थिति है—सब कुछ अपनी जगह पर, गर्म और कुरकुरा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, वह ठंडा होता है, उसका तेल ऑक्सीडाइज होता है, और अंततः वह एक लेईदार, बेस्वाद पदार्थ में बदल जाता है। एक कॉर्पोरेट संगठन भी बिल्कुल वैसा ही है। अगर हर सुबह उसमें 'काम' नाम का मसाला और कर्मचारियों का खून-पसीना न भरा जाए, तो वह शाम तक बासी तेल की गंध मारने लगेगा। हम सब बस उस समोसे को कुरकुरा रखने के लिए अपनी नसों का तेल जला रहे हैं।
महँगा संतुलन
जब हम ‘पब्लिक वैल्यू’ या ‘शेयरहोल्डर वैल्यू’ की बात करते हैं, तो यह सुनने में बहुत भारी-भरकम लगता है। लेकिन भौतिकी की दृष्टि से, एक कंपनी केवल एक ‘डिसिपेटिव स्ट्रक्चर’ (Dissipative Structure) है। यह एक ऐसा सिस्टम है जो जीवित रहने के लिए बाहर से ऊर्जा (पैसा, संसाधन, मानव श्रम) सोखता है और बदले में समाज में ‘गर्मी’ या कचरा फेंकता है। कोई भी सिस्टम अलग-थलग रहकर जीवित नहीं रह सकता। उसे अपने आसपास के वातावरण को प्रदूषित करना ही पड़ता है—चाहे वह कार्बन हो या कर्मचारियों का मानसिक तनाव।
इस व्यवस्था को बनाए रखने की कीमत आपकी रीढ़ की हड्डी चुकाती है। जब आप दिन में दस घंटे उस घटिया ऑफिस कुर्सी पर बैठते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण आपकी कशेरुकाओं (Vertebrae) के साथ वही करता है जो एक हथौड़ा पुरानी दीवार के साथ करता है। धीरे-धीरे, आपकी पीठ का वह प्राकृतिक कर्व (Curve) सीधा होने लगता है, और आप दर्द के एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाते हैं जहाँ से निकलना नामुमकिन लगता है। इस बिंदु पर, जब डॉक्टर आपको सर्जरी की धमकी देता है, तब आपको समझ आता है कि भौतिकी के नियमों से लड़ने के लिए आपको बेहतर हथियारों की जरूरत है। यही वह क्षण है जब आप अपनी बची-खुची बचत निकालकर एक एरोन चेयर खरीदते हैं। ढाई लाख रुपये एक कुर्सी के लिए? सुनने में पागलपन लगता है। लेकिन जब विकल्प व्हीलचेयर हो, या हर रात का दर्द हो, तो यह एर्गोनोमिक चमत्कार कोई विलासिता नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण को दी जाने वाली फिरौती (Ransom) बन जाता है। यह एक कड़वा सौदा है: आप एक सिस्टम को चलाने के लिए अपनी कमर तोड़ते हैं, और फिर उस टूटी कमर को संभालने के लिए उसी सिस्टम से कमाए पैसे को एक कुर्सी पर खर्च कर देते हैं। क्या शानदार बिज़नेस मॉडल है।
अनिवार्य पतन
अंततः, जिसे हम ‘कॉर्पोरेट कल्चर’ कहते हैं, वह शोर (Noise) को सूचना (Information) में बदलने की एक विफल कोशिश है। सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के अनुसार, जितनी अधिक अव्यवस्था होगी, उसे व्यवस्थित करने के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा खर्च होगी। यही कारण है कि जैसे-जैसे कंपनियाँ बड़ी होती हैं, वे सुस्त और नौकरशाही (Bureaucratic) होती जाती हैं। वे अपने ही द्वारा पैदा की गई आंतरिक ऊष्मा को बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती हैं। यह एक पुराने स्मार्टफोन की तरह है जिसकी बैटरी अब दोपहर तक भी नहीं चलती। हम नए ‘सीईओ’ या ‘कंसल्टेंट्स’ को बुलाकर उसे चार्ज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हार्डवेयर (बुनियादी ढांचा) ही सड़ चुका है।
ब्रह्मांड को आपकी तिमाही रिपोर्ट, आपके ‘की परफॉरमेंस इंडिकेटर्स’ (KPIs) या आपके बोनस से कोई लेना-देना नहीं है। वह तो बस इस इंतज़ार में है कि कब आप अपनी ऊर्जा देना बंद करें और वह आपको और आपके उस ‘महान संगठन’ को वापस धूल में मिला दे। एन्ट्रॉपी हमेशा जीतती है; यह कैसीनो का वह जुआ है जहाँ ‘हाउस’ कभी नहीं हारता। मैं थक गया हूँ। अब घर जाकर एक कप कड़क चाय पीनी है, इससे पहले कि वह ठंडी होकर कमरे के तापमान के साथ थर्मल इक्विलिब्रियम (Thermal Equilibrium) में आ जाए। कम से कम वह एक जंग तो मैं जीत ही सकता हूँ।
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