पिछली बार हमने चर्चा की थी कि कैसे ‘ओपन ऑफिस’ की संस्कृति वास्तव में निजता का एक व्यवस्थित कसाईखाना है। लेकिन चलिए, आज उस पाखंड की परतों को थोड़ा और उधेड़ते हैं जिसे आपके लिंक्डइन-प्रेमी मैनेजर बड़े गर्व से ‘संगठनात्मक शिक्षण’ (Organizational Learning) कहते हैं। यह एक ऐसा सामूहिक भ्रम है जहाँ हर कोई यह मानने का नाटक करता है कि वे कल से बेहतर हो रहे हैं, जबकि वास्तव में वे केवल एक बहुत ही महंगे और वातानुकूलित पिंजरे में अपनी जैविक घड़ी की टिक-टिक सुन रहे हैं।
कोलाहल और भूख का समीकरण
जब भी मैं किसी एचआर हेड को ‘नलेज ट्रांसफर’ या ‘सिनर्जी’ जैसे शब्दों का वमन करते हुए सुनता हूँ, तो मुझे सड़क किनारे खड़े उस ‘छोटू’ की याद आती है जो बिना किसी मैनुअल के उबलती चाय के पतीले में अदरक कूटता है। वहां वास्तविक शिक्षण है; वहां परिणाम तुरंत मिलता है। इसके विपरीत, आधुनिक दफ्तरों में जिसे हम ‘सीखना’ कहते हैं, वह केवल सूचनाओं का एक महंगा कचरा है। हकीकत यह है कि मानव मस्तिष्क, जो मूल रूप से एक उच्च-रखरखाव वाला जैविक कैलकुलेटर है, सामाजिक भावनाओं को एक ‘बग’ की तरह संभालता है।
जब आप उस बेमन से आयोजित वर्कशॉप में बैठे होते हैं, तो क्या आप वास्तव में कंपनी के ‘मिशन स्टेटमेंट’ के बारे में सोच रहे होते हैं? नहीं। आपका ध्यान कैंटीन के उस ठंडे समोसे की तैलीयता, एसिडिटी, और महीने के अंत में आने वाले क्रेडिट कार्ड के बिल पर होता है। यह ‘सीखना’ नहीं है; यह केवल अपनी हताशा और भूख की एन्ट्रापी (Entropy) को बगल वाले सहकर्मी पर थोपना है। हम जानकारी का आदान-प्रदान नहीं करते; हम केवल एक-दूसरे के साथ अपनी अस्तित्वगत ऊब और कोलाहल (Noise) साझा करते हैं, उम्मीद करते हैं कि इससे दिन जल्दी कट जाएगा।
भ्रष्ट मैनिफोल्ड की वक्रता
अब, थोड़ी देर के लिए अपनी मानवीय भावनाओं को किनारे रखें—वैसे भी कॉर्पोरेट दुनिया में उनकी कोई कीमत नहीं है—और ‘सूचना ज्यामिति’ (Information Geometry) की ठंडी दुनिया में कदम रखें। गणित में, ‘फिशर सूचना मीट्रिक’ (Fisher Information Metric) यह मापता है कि हम एक सांख्यिकीय मॉडल के मापदंडों का अनुमान कितनी अच्छी तरह लगा सकते हैं। लेकिन इस दफ्तर के संदर्भ में, मैं इसे पुन: परिभाषित करना चाहूंगा: यह एक पैमाना है जो यह नापता है कि एक सक्षम कर्मचारी की आत्मा और समय को चूसने में संगठन कितना क्रूरता से कुशल है।
संगठन को एक ‘सांख्यिकीय मैनिफोल्ड’ (Statistical Manifold) के रूप में देखें। यहाँ ‘इनोवेशन’ के लिए कोई सीधी सड़क नहीं है। जिसे आप ‘सफलता का रास्ता’ कहते हैं, वह ज्यामिति की भाषा में ‘जियोडेसिक’ (Geodesic) होना चाहिए—यानी दो बिंदुओं के बीच की न्यूनतम दूरी। लेकिन अफसोस, आपके दफ्तर की राजनीति और बॉस के अहंकार के गुरुत्वाकर्षण ने इस स्थान की ‘वक्रता’ (Curvature) को इतना विकृत कर दिया है कि यहाँ का जियोडेसिक ‘कड़ी मेहनत’ से नहीं, बल्कि ‘चापलूसी’ के कीचड़ से होकर गुजरता है। यह वह रास्ता है जहाँ आप बॉस के हर बेतुके मजाक पर हंसते हैं, अपनी रीढ़ की हड्डी को मोड़कर रबर बना लेते हैं, और रेंगते हुए उस पदोन्नति की ओर बढ़ते हैं जो आपको केवल और अधिक तनाव देगी।
इस विकृति का सबसे बड़ा सबूत देखना है? उस सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को देखिए जो मीटिंग में एक महंगे इतालवी चमड़े के ब्रीफकेस के साथ दाखिल होता है। वह इस मृत गाय की खाल के लिए पचास हजार रुपये क्यों खर्च करता है? क्या इसमें देश के परमाणु कोड रखे हैं? नहीं, इसमें शायद लंच के बाद की माउथ फ्रेशनर, कुछ रद्दी कागज और उसकी अपनी असुरक्षाओं के अलावा कुछ नहीं है। वह इस महंगी वस्तु को ढाल बनाकर अपने व्यक्तित्व के शून्य को भरने की कोशिश कर रहा है। ज्यामितीय रूप से कहें तो, वह अपनी कम होती प्रासंगिकता की ‘वक्रता’ को छिपाने के लिए एक सपाट, महंगी सतह खरीद रहा है। यह दृश्य ही अपने आप में एक त्रासदी है।
ऊष्मागतिकीय मृत्यु
अंततः, हम ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के दूसरे नियम पर लौटते हैं: एक बंद प्रणाली में एन्ट्रापी हमेशा बढ़ती है। ‘संगठनात्मक शिक्षण’ का हर सत्र वास्तव में ऊर्जा का अपव्यय है। जब आप ज्ञान को एक दिमाग से दूसरे दिमाग में जबरदस्ती ठूंसने की कोशिश करते हैं, तो घर्षण होता है। यह घर्षण ‘मूर्खता’ और ‘थकान’ के रूप में प्रकट होता है। जितनी लंबी मीटिंग होगी, कमरे का तापमान उतना ही बढ़ेगा और सामूहिक बुद्धि उतनी ही तेजी से वाष्पित हो जाएगी।
फिशर सूचना का अधिकतम मान वहां होता है जहाँ अनिश्चितता सबसे कम हो। कॉर्पोरेट भाषा में इसका अनुवाद है: पूर्ण अनुरूपता। एक ऐसा संगठन जहाँ हर कोई एक जैसा सोचता है, एक जैसा झूठ बोलता है, और एक जैसा डरता है। यह स्थिरता नहीं है; यह ‘हीट डेथ’ (Heat Death) है। हम सब बस उस बिंदु की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ कोई हलचल नहीं होगी, बस एक अंतहीन, उबाऊ शांति।
बस, बहुत हो गया। मेरा दिमाग अब इस बकवास को और प्रोसेस नहीं कर सकता। अगली बार जब आपका मैनेजर ‘लर्निंग कर्व’ (Learning Curve) की बात करे, तो याद रखिएगा कि गणितीय रूप से हर वक्र अंततः एक स्पर्शरेखा (Tangent) पर जाकर अपनी दिशा खो देता है, ठीक वैसे ही जैसे आप इस नौकरी में अपनी जवानी खो रहे हैं। ज्यामिति झूठ नहीं बोलती, लेकिन उसे पढ़ाने वाले पीपीटी स्लाइड जरूर बोलते हैं।
コメントを残す