कब्रिस्तान की ओर जाने वाली मेट्रो
समाज जिसे ‘सफल करियर’ का नाम देता है, वह वास्तव में एक धीमी, यंत्रवत आत्महत्या है। सुबह का अलार्म आपकी नींद को नहीं, बल्कि आपकी आत्मा को कुचलता है। मेट्रो के उस डिब्बे में, जहाँ हवा में ऑक्सीजन कम और हताशा ज्यादा होती है, आप लटकते हैं—मांस के लोथड़ों की तरह। यह कोई ‘सफर’ नहीं है; यह एक स्लॉटरहाउस की ओर ले जाने वाला कन्वेयर बेल्ट है। एक क्रूर भौतिक विज्ञानी (Physicist) की नजर से देखूँ, तो आप ऑफिस काम करने नहीं जा रहे; आप अपनी ‘नेगेटिव एंट्रॉपी’ (Negentropy) की बलि चढ़ाने जा रहे हैं ताकि एक निर्जीव कंपनी सांस ले सके। जिसे आप ‘प्रोफेशनलिज्म’ कहते हैं, वह सिर्फ अपनी जीवन ऊर्जा को एक ब्लैक होल में फेंकने का फैंसी नाम है।
व्यवस्था का धोखा: एक अपक्षयी संरचना
हर संगठन, चाहे वह कोई ‘फॉर्च्यून 500’ कंपनी हो या लाला की दुकान, भौतिकी के नियमों के अनुसार एक ‘अपक्षयी संरचना’ (Dissipative Structure) है। इल्या प्रिगोजिन ने नोबेल पुरस्कार जीता यह बताने के लिए कि ‘व्यवस्था’ (Order) को बनाए रखने के लिए ऊर्जा की निरंतर खपत जरूरी है। कॉर्पोरेट भाषा में, वह ईंधन आप हैं। कंपनी एक विशालकाय परजीवी है जो खुद को बिखरने से बचाने के लिए आपके मानसिक स्वास्थ्य को चूसती है।
जब आप एक्सेल शीट भरते हैं या बेमतलब की मीटिंग्स में सिर हिलाते हैं, तो आप ‘वैल्यू क्रिएट’ नहीं कर रहे होते; आप बस ब्रह्मांडीय अराजकता (Chaos) को कुछ पलों के लिए दरवाजे के बाहर रोक रहे होते हैं। यह एक हारी हुई लड़ाई है। आप उस दीवार पर लगी सस्ती पुट्टी हैं जो दरारों को छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि पूरी इमारत की नींव ही दलदल में धंस रही है। और इनाम में आपको क्या मिलता है? महीने के अंत में एक ऐसा नंबर जो आपके बैंक खाते में आते ही ईएमआई (EMI) के रूप में वाष्पित हो जाता है।
मुस्कान का पोस्टमार्टम: मानसिक सीवेज ट्रीटमेंट
अब जरा उस ‘मुस्कान’ का विश्लेषण करें जिसे एचआर वाले ‘सकारात्मक दृष्टिकोण’ कहते हैं। जब कोई ग्राहक फोन पर आप पर चिल्लाता है, और आप जवाब में “क्षमा करें सर” कहते हैं, तो यह विनम्रता नहीं है। यह ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) का सबसे घिनौना रूप है। ग्राहक ‘शोर’ (Noise) और ‘गर्मी’ (Heat) पैदा कर रहा है। आपका दिमाग एक ‘हीट सिंक’ (Heat Sink) है। आप उस कचरे को अपने अंदर सोख लेते हैं ताकि सिस्टम का तापमान न बढ़े। यह ‘सेवा’ नहीं है; यह मानसिक सीवेज ट्रीटमेंट है। आप नंगे हाथों से दूसरों के अहंकार का मल साफ कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया में आपका नर्वस सिस्टम शॉर्ट-सर्किट होता है। आपकी रीढ़ की हड्डी, जो शिकार करने और भागने के लिए बनी थी, अब 12 घंटे एक ही मुद्रा में अकड़ी रहती है। और इस शारीरिक पतन का इलाज क्या है? पूंजीवाद आपको एक और उत्पाद बेचता है। आप अपनी टूटी हुई कमर को सहारा देने के लिए महंगी एर्गोनोमिक कुर्सी खरीदते हैं। एक ऐसी कुर्सी जिसकी कीमत में एक छोटे देश की जीडीपी समा जाए। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि अपनी हड्डियों को चूरा होने से बचाने के लिए, आप अपनी मेहनत की कमाई उसी सिस्टम को वापस दे देते हैं जिसने आपको तोड़ा था। यह एक दुष्चक्र है—आप काम करते हैं ताकि कुर्सी खरीद सकें, और कुर्सी खरीदते हैं ताकि और काम कर सकें। यह सिर्फ बेवकूफी नहीं, यह त्रासदी है।
राख ही सत्य है
अंततः, हम सब बस जल रहे हैं। ‘बर्नआउट’ कोई मुहावरा नहीं है; यह एक भौतिक वास्तविकता है। एक इंजन की तरह, हम काम करते हुए अपशिष्ट (Waste) पैदा करते हैं—तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, और पेट का अल्सर। कंपनी अपनी बैलेंस शीट को साफ-सुथरा रखती है क्योंकि उसने अपनी सारी गंदगी आपके शरीर और दिमाग में डंप कर दी है। आप शाम को घर नहीं लौटते; आप एक खाली खोल की तरह वापस फेंके जाते हैं, जिसे अगले दिन फिर से भरने के लिए बुलाया जाएगा।
पहाड़ों में जाकर ‘शांति’ तलाशने का ख्याल भी एक धोखा है। आप जहाँ भी जाएंगे, एंट्रॉपी आपके पीछे आएगी। भूख, प्यास, और अस्तित्व का बोझ—ये वो कर (Tax) हैं जो आपको चुकाने ही होंगे। हम ब्रह्मांड के उस कसीनो में हैं जहाँ ‘हाउस’ (House) हमेशा जीतता है। आपका जीवन उस मोमबत्ती की तरह है जो दोनों सिरों से जल रही है, और बीच में कॉर्पोरेट जगत उसे पिघला रहा है। तो अगली बार जब बॉस ‘टीम स्पिरिट’ की बात करे, तो याद रखना: वह सिर्फ आपकी बची-कुची ऊर्जा मांग रहा है ताकि उसकी कुर्सी की टांगें न डगमगाएं। सब कुछ राख हो जाएगा। बस बिजली का बिल भरना मत भूलना।
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