पिछली बार जब हम उस धुएँ से भरे ढाबे में बैठे थे, तो मैंने कहा था कि आधुनिक कॉर्पोरेट संरचनाएं अंततः धूल की एक ढेरी में बदल जाती हैं। आज, उस विलाप को थोड़ा और वैज्ञानिक, लेकिन क्रूर रंग देते हैं। आप लोग जिसे ‘रणनीति’ या ‘विज़न’ जैसे भारी-भरकम शब्दों से सजाते हैं, वह ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) की नजर में केवल ‘आखरी साँसें’ हैं।
पेट की आग और नोटों का धुआँ
व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र (Business Ecosystem) कोई पवित्र ज्यामितीय संरचना नहीं है। यह, सच कहूँ तो, पुरानी दिल्ली की गली में सड़ रहे कचरे के ढेर जैसा है, जहाँ से लगातार ऊष्मा (Heat) निकल रही है। प्रिगोगिन ने जिसे ‘डिसिपेटिव स्ट्रक्चर’ कहा था, वह असल में आपके ऑफिस का वह क्यूबिकल है जहाँ आप अपनी जवानी जलाकर ‘व्यवस्था’ बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
आप जिसे ‘हार्ड वर्क’ कहते हैं, वह केवल एन्ट्रापी (अव्यवस्था) को बाहर धकेलने का एक महंगा तरीका है। हर सुबह, जब आप नींद और अस्तित्व के संकट से जूझते हुए वह सस्ती इंस्टेंट कॉफी हलक से नीचे उतारते हैं, जिसका स्वाद बैटरी के तेजाब जैसा होता है, तो आप असल में नेगेंट्रॉपी (Negentropy) का उपभोग कर रहे होते हैं। बदले में आप क्या देते हैं? तनाव, पसीना, और बेतुकी मीटिंग्स की गर्मी। यह तंत्र आपकी जीवन ऊर्जा को चूसकर उसे ‘तिमाही मुनाफे’ में बदलता है और अपशिष्ट के रूप में आपको मानसिक थकान देता है। जिसे आप ‘टीम वर्क’ कहते हैं, वह बस एक साथ मिलकर जलने की प्रक्रिया है।
क्या बकवास है।
मशीनी सन्नाटा और मानवीय शोर
अब इस गन्दी प्रक्रिया में ‘स्वचालन’ (Automation) या तथाकथित AI को डाल दीजिये। इसे किसी मसीहा की तरह मत देखिए। यह विकास नहीं है, यह एक ‘कोल्ड फ़िल्टर’ है। इंसानी जज्बात—जैसे लंच के बाद आने वाली सुस्ती या बॉस की कुर्सी के लिए जलने वाली ईर्ष्या—सिस्टम के लिए केवल ‘शोर’ (Noise) हैं। मशीनें इन जैविक त्रुटियों को पहचानती हैं और उन्हें गणितीय निर्ममता से काट फेंकती हैं।
लोग डरते हैं कि रोबोट उनकी नौकरी खा जाएंगे। असल डर यह होना चाहिए कि मशीनें आपकी उस पोल को खोल देंगी जिसे आप सालों से छिपा रहे थे। मैंने देखा है कि कैसे मिडिल मैनेजमेंट के लोग अपनी नाकामी और खालीपन को छिपाने के लिए महंगी लेदर नोटबुक खरीदते हैं, जिसमें वे वो ‘आइडिया’ लिखते हैं जिन्हें रद्दी की टोकरी भी स्वीकार न करे। एक एल्गोरिदम को आपके इस पाखंड या आपके ‘अनुभव’ से कोई लेना-देना नहीं है। उसके लिए, आपकी ‘विरासत’ केवल डेटा में एक अकुशलता है जिसे ऑप्टिमाइज़ किया जाना है। यह कोई क्रांति नहीं है, यह बस कचरा साफ़ करने का अभियान है।
शून्यता की ओर दौड़
अंततः, चाहे वह कोई स्टार्टअप हो जो दुनिया बदलने का दावा करता है, या कोई विशाल साम्राज्य, सब कुछ एक ‘थर्मोडायनामिक इक्विलिब्रियम’ की ओर बढ़ रहा है। यानी—मौत। पूर्ण शांति। एक पूरी तरह से स्वायत्त संगठन (Autonomous Organization) में कोई नाटक नहीं होता, कोई राजनीति नहीं होती, और इसलिए, कोई ‘जीवन’ भी नहीं होता। वह बस एक ठंडी मशीन है जो ब्रह्मांड की शून्यता में बिना आवाज किए चल रही है।
इंसानी अहंकार यह स्वीकार नहीं कर सकता कि उसकी सारी भागदौड़ अंततः व्यर्थ है। हम ‘जुगाड़’ से ब्रह्मांड के नियमों को धोखा देने की कोशिश करते हैं, जैसे फटे हुए टायरों वाली गाड़ी को धक्का देना। पर अंत में, ऊष्मा बिखर जाएगी और सब कुछ ठंडा पड़ जाएगा। तो, अगर आप अब भी इस भ्रम में हैं कि आपका ‘कैरियर’ मायने रखता है, तो शौक से जीयें।
बाहर मौसम ख़राब है। हकीकत की बारिश से बचने के लिए, बेहतर होगा कि आप कोई मजबूत छाता खरीद लें, क्योंकि न तो विज्ञान और न ही बाज़ार आपकी भावनाओं की परवाह करता है। मैं अब और नहीं बोल सकता, गला सूख गया है।
बिल चुका देना। मैं जा रहा हूँ।
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