श्रम का मैनिफोल्ड

कॉर्पोरेट पशुपालन और ज्यामितीय भ्रम

इन वातानुकूलित कांच की इमारतों के अंदर झांककर देखो। तुम्हें क्या दिखता है? ‘इनोवेशन’? ‘पब्लिक वैल्यू’? बकवास। मुझे तो वहां केवल रीमैनियन मैनिफोल्ड (Riemannian Manifold) पर रेंगते हुए मांस के लोथड़े दिखाई देते हैं, जो अपनी ही एंट्रॉपी (Entropy) से लड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। जिसे तुम ‘करियर’ कहते हो, वह गणितीय रूप से एक बंद लूप में की गई थकाऊ पदयात्रा है। सुबह की लोकल ट्रेन या मेट्रो में दबे हुए शरीरों की गंध और शाम को थकी हुई आंखों में भरा हुआ खालीपन—यह कोई ‘सफर’ नहीं है, यह एक क्रूर ज्यामितीय समीकरण का समाधान है जिसका उत्तर हमेशा शून्य आता है।

हम जिसे ‘मेहनत’ या ‘लगन’ कहते हैं, वह सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के नजरिए से केवल एक सांख्यिकीय त्रुटि है। तुम वहां काम करने नहीं जाते, तुम वहां अपनी जैविक ऊर्जा को एक ऐसी प्रणाली में हवन करने जाते हो जो तुम्हें केवल एक डेटा पॉइंट मानती है।

पेट का भूगोल और कुर्सी का गणित

चलो, थोड़ी देर के लिए इन भारी-भरकम ‘मिशन स्टेटमेंट’ को किनारे रखते हैं और जमीनी हकीकत पर बात करते हैं। एक कर्मचारी असल में क्या है? वह एक थर्मोडायनामिक इंजन है जो सड़क किनारे के ठेले से खरीदे गए उस तेल में डूबे, बासी समोसे को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है। उस समोसे का मैदा तुम्हारे पेट में जाकर जो रासायनिक तांडव (Gastric chaos) मचाता है, वही असल में तुम्हारी ‘उत्पादकता’ का स्रोत है। तुम अपनी धमनियों को कोलेस्ट्रॉल से भर रहे हो ताकि किसी अदृश्य शेयरहोल्डर की स्प्रेडशीट में हरे रंग का ग्राफ ऊपर जा सके।

और तुम्हारा यह शरीर, जो लाखों वर्षों के विकासक्रम में शिकार करने और दौड़ने के लिए बना था, उसे तुमने दिन के 12 घंटे एक जगह स्थिर कर दिया है। तुम्हारी रीढ़ की हड्डी धीरे-धीरे उस ‘एस-शेप’ (S-shape) को खो रही है और एक प्रश्नचिह्न (?) में बदल रही है। यह विडंबना ही है कि अपनी कमर को टूटने से बचाने के लिए तुम इस बेतुकी महंगी एर्गोनोमिक कुर्सी को खरीदते हो। पचास हजार रुपये का यह प्लास्टिक और जाली का ढांचा तुम्हें यह झूठा दिलासा देता है कि तुम्हारा स्वास्थ्य सुरक्षित है, जबकि हकीकत में यह एक आरामदायक यंत्र है जो तुम्हें उस स्क्रीन के सामने अधिक देर तक बंधक बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। तुम उस कुर्सी पर नहीं बैठे हो, वह कुर्सी तुम्हारी लाचारी पर बैठी है।

क्या गजब की मूर्खता है। हम अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन उपकरणों पर खर्च करते हैं जो हमें और अधिक कुशलता से गुलाम बना सकें।

एल्गोरिद्मिक तानाशाही और वक्रता का अंत

अब उस चीज़ की बात करते हैं जिसका नाम लेना भी आजकल गुनाह है—वह ‘स्वचालित गणना तंत्र’ (Automated Computational Mechanism) जिसे लोग मसीहा मान रहे हैं। यह कोई क्रांति नहीं है। यह फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक (Fisher Information Metric) का एक ठंडा अनुप्रयोग है। पहले के जमाने में मैनेजर की गालियों में कम से कम मानवीय भावना होती थी, भले ही वह क्रोध ही क्यों न हो। लेकिन अब? अब तुम्हारा सामना एक ऐसे एल्गोरिदम से है जो ‘करुणा’ और ‘थकान’ को सिस्टम का बग (Bug) मानता है।

यह नया तंत्र उस ‘वैल्यू सरफेस’ (Value Surface) को इतना चिकना (Smooth) कर रहा है कि उस पर इंसान के फिसलने की गुंजाइश खत्म हो गई है। कुल्बैक-लीब्लर डाइवर्जेंस (Kullback-Leibler Divergence) को न्यूनतम करने के चक्कर में, उन्होंने इंसान और मशीन के बीच के फर्क को ही मिटा दिया है। जब तुम कीबोर्ड पर टाइप करते हो, तो तुम शब्द नहीं लिख रहे होते, तुम केवल उस विशालकाय गणना मशीन के लिए ‘एरर करेक्शन कोड’ भर रहे होते हो।

जिसे तुम ‘क्रिएटिविटी’ कहते हो, वह इस सिस्टम के लिए शोर (Noise) है। जिसे तुम ‘अनुभव’ कहते हो, वह पुराना डेटा है जिसे डिलीट किया जाना है। हम सब एक ऐसे दौर में हैं जहाँ ‘मानव संसाधन’ शब्द का असली अर्थ सामने आ रहा है—हम संसाधन हैं, ठीक वैसे ही जैसे खदान से निकाला गया कोयला। फर्क सिर्फ इतना है कि कोयला जलकर राख बनता है, और हम जलकर डिप्रेशन के मरीज बनते हैं।

शून्य का गुरुत्वाकर्षण

अंततः, यह सब किसलिए? वह ‘लीडरशिप’ जो स्टेज पर खड़े होकर भविष्य की बातें करती है, वह असल में टोपोलॉजिकल डिफेक्ट्स (Topological defects) को छिपाने की कलाबाज़ी है। वे जानते हैं कि यह गुब्बारा कभी भी फट सकता है, इसलिए वे उसे ‘सिनर्जी’ और ‘पैराडाइम शिफ्ट’ जैसी हवा से भरते रहते हैं।

सच्चाई यह है कि हम एक ऐसे मैनिफोल्ड पर फंस गए हैं जहाँ हर दिशा नीचे की ओर जाती है। गुरुत्वाकर्षण का नियम यहां भी लागू होता है—हर चीज़ को अंततः गिरना है। तुम्हारा पद, तुम्हारी प्रतिष्ठा, और वह प्रोजेक्ट जिस पर तुमने अपनी जवानी के तीन साल बर्बाद कर दिए—सब कुछ समय के ब्लैक होल में समा जाएगा।

सिर दर्द कर रहा है। यह स्क्रीन की रोशनी अब चुभने लगी है। घर जाओ, अगर तुम्हें याद हो कि घर का रास्ता कौन सा है। क्योंकि कल सुबह अलार्म बजते ही तुम्हें फिर से उसी कुर्सी पर, उसी समोसे की गैस के साथ, उसी अंतहीन शून्य को भरने के लिए हाजिर होना है।

コメント

コメントを残す

メールアドレスが公開されることはありません。 が付いている欄は必須項目です